अध्याय 7
शूद्र कौन थे-क्या शूद्र क्षत्रिय थे?
हमारे सामने अब यह प्रश्न है कि शूद्र यदि मूलतः अनार्य नहीं थे तो और कौन थे? मेरे मतानुसार इसके तीन उत्तर निम्न प्रकार हैंःµ
शूद्र आर्य थे।
शूद्र क्षत्रिय थे।
शूद्र क्षत्रियों में इतने उत्तम और महत्वपूर्ण वर्ण थे कि प्राचीन आर्यों के समुदाय में
अनेक शूद्र तेजस्वी और बलशाली राजा थे।
शूद्रों की उत्पत्ति का यह सिद्धांत यदि विस्मयकारी नहीं है तो रोमांचक अवश्य है। अधिकतर विद्वान इस मत को स्वीकार नहीं करेंगे। किन्तु इसकी पुष्टि के लिए यथेष्ट साक्ष्य उपलब्ध है। अतः मैं प्रमाण प्रस्तुत करना अपना कर्तव्य समझता हूं और उसका निर्णय विज्ञ पाठकों के विवेक पर छोड़ता हूं।
प्रथम साक्ष्य महाभारत के शांतिपर्व (अध्याय 60 के श्लोक 38-40) का हैः - ‘‘हमने सुना है कि प्राचीन काल में पेंजवन नामक शूद्र राजा के अपने यज्ञ में एन्द्राग्नि के विधानानुसार एक सौ सहस्त्र पूर्णपात्र दक्षिणा दी थी।’’
इस उदाहरण में निम्नलिखित तीन महत्वपूर्ण साक्ष्य प्रकट होते हैंःµ
पैजवन शूद्र था,
शूद्र पैजवान ने यज्ञ किया, और
ब्राह्मणों ने पैजवन के निमित्त यज्ञ कर दक्षिणा ली।
उपरोक्त उद्धरण श्री राय द्वारा महाभारत की भाष्य टीका से लिया गया है। पहली बात तो यह देखनी है कि क्या यह पाठ मूल है अथवा इसमें कुछ अंतर है। इसकी मौलिकता के बारे में श्री राय ख्1, कहते हैं, ‘‘जहां तक मेरे संस्करण का प्रश्न है यह रायल एशियाटिक सोसायटी आफ बंगाल के पचास वर्ष पुराने संस्करण पर आधारित है जो बंगाल के कुछ विद्वान पंडि़तों की सहायता से तैयार किया गया। मेरा ख्याल है इसका
- सुकथानकार मेमोरियल एडीसन खंड 1, पृष्ठ 43-44 से उद्धृत।