शूद्र कौन थे- क्या शूद्र क्षत्रिय थे?
- शूद्रः यैलननो नाम (एम/3ः एम/ 4) दक्षिणात्य
- शूद्रः यैजननो नाम (एफ)
- शूद्रोपि यजने नाम (एल)
- शूद्रः पौंजलक नाम (टी. सी.) दक्षिणात्य
- शूद्रों वैभवनों नाम (जी) उत्तरात्य
- पुरा वैजवनो नाम (ए डल/2)
- पुरा वैजननो नाम (एम) उत्तरात्य
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इन नौ पांडुलिपियों के मिलान से यह परिणाम निकलता है कि क्या ये नौ पांडुलिपियां संकलन करने के लिए पर्याप्त है जिनमें अंतर है? यह सत्य है कि महाभारत के विविध पर्वो के नौ से अधिक भाष्य हैं। पूरे महाभारत में से कम से कम पांडुलिपियां दस ख्1, ही ली गई हैं। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि नौ संख्या अपर्याप्त है। ये नौ पांडुलिपियां भौगोलिक (उत्तर, दक्षिण) के विभाजन के अनुसार हैं। महा (एम.) 1,2,3,4 और टी. सी. दक्षिणात्य की है। ए. एम. जी. डी/2 उत्तरात्य की हैं। इन पांडुलिपियों के चयन से विद्वान संतुष्ट होंगे।
इस जांच का यह निष्कर्ष निकलता है किः
पैजवन के वर्णन में विविधता/भिन्नता है।
पैजवन के नाम में भिन्नता है।
नौ पांडुलिपियों में से 6 उसे ‘‘शूद्र’’ कहती है एक ‘‘शूद्र’’ कहती है तथा दो ने
उसकी जाति का उल्लेख न कर उसके समय का वर्णन करते हुए ‘‘पुरा’’ शब्द
का प्रयोग किया है।
- नाम के संबंध में किन्हीं दो पांडुलिपियों में समानता नहीं है। प्रत्येक का पाठ
अलग-अलग है। अब प्रश्न यह है कि सही नाम क्या है? नाम के संबंध में पहली
बात यह है कि नाम के अर्थ का प्रश्न उत्पन्न हो। इससे व्याख्या का कोई विवाद
नहीं उठता, न संशोधन का और न प्राथमिकता का। प्रश्न यह है कि सही नाम
क्या हैं और कौन सा गलत है जिसके कारण पाठान्तर हुआ? इसमें कोई संदेह नहीं
कि सही नाम पैजवान है। यह दक्षिणात्य और उत्तरात्य दोनों को मान्य है क्योंकि
आठवें क्रम का नाम वैजवन पैजवन के समान ही है। शेष सब पाठांतर मूल प्रति
सही न पढ़ पाने के कारण हुआ है जिसमें लिपिकार ने जो समझ में आया वही
लिख दिया। जहां तक पैजवन के वर्णन का संबंध है, इस (पैजवन को) ‘‘शूद्र’’
- सुकथानकार खंड 1, पृष्ठ 14