104 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाड्ख्.,मय
की पत्नियों पर छोड़ दिया गया। केशिनी ने एक पुत्र की इच्छा प्रकट की और सुमति ने अनेक की। केशिनी ने असमंजस नामक पुत्र को जन्म दिया। असमंजस से सगर वंश चला। विनता की पुत्री सुमति ने साठ हजार पुत्रों को जन्म दिया।
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असमंजस का पुत्र अंशुमान और अंशुमान का पुत्र दिलीप हुआ। दिलीप के पुत्र का नाम भगीरथ था। वह गंगा को स्वर्ग से धरती पर लाए, अतः उनके नाम पर गंगा भागीरथी कहलाई। भागीरथ का पुत्र श्रुस, उसका पुत्र, नाभाग, उसका पुत्र अम्बरीष और अम्बरीष का पुत्र सिंधुद्वीप हुआ। सिंधुद्वीप का पुत्र आयुतश्व, आयुतश्व का पुत्र प्रसिद्ध जुआरी नल का मित्र ऋतुपर्ण, ऋतुपर्ण का सर्वकाम, सर्वकाम का पुत्र सुदास, सुदास का पुत्र सोदास हुआ। सोदास को मित्रशाह भी कहा जाता है।’’
विष्णु पुराण के 19वें अध्याय में पुरू के वंशज एक अन्य सुदास का विवरण इस प्रकार हैः-
‘‘पुरू का पुत्र जनमेजय था’’ जनमेजय का पुत्र प्राचीन्वत, उसका पुत्र प्रवार, उसका पुत्र मनस्यु, उसका पुत्र भयद, उसका पुत्र सुद्यम्न, उसका पुत्र बाहुगव, उसका पुत्र सम्मति उसका पुत्र भाम्पति हुआ। भाम्पति के पुत्र रूद्रश्व के रीतेयु, कोक्षेयु, स्थानदिलेयु ध्रितेयु, जलेयु, स्थलेयु, धनेयु, वनेयु, और व्रतेयु दस पुत्र हुए। रीतेयु के पुत्र रतिनार के तीन पुत्र तन्स, अप्रतीर्थ और ध्रुव हुए। दूसरे के पुत्र कण्व वे मेघितिथि हुआ जिससे काण्वायन ब्राह्मण पैदा हुए। तनसु के पुत्र अनिल के चार पुत्रों में दुष्यंत ज्येष्ठ था। दुष्यंत का पुत्र भरत चक्रवर्ती राजा हुआ।’’
भरत के पत्नियों ने 9 पुत्रों को जन्म दिया। किन्तु भरत के यह कहने पर कि वे उसके अंश से उत्पन्न नहीं हुए हैं, इसलिए उन सभी को उनकी माताओं ने मार दिया। कालांतर में भरत ने मरुदगण की स्तुति की। मरुदगण ने प्रसन्न होकर उसे उताथ्य की पत्नी ममता के गर्भ से बृहस्पति द्वारा उत्पन्न पुत्र भारद्वाज दे दिया।
भारद्वाज का दूसरा नाम वितथ पड़ा। वितथ का पुत्र भवनमन्धु हुआ। उसके अनेक पुत्र हुए। जिनमें ब्रहत्क्षात्र, महावीर्य, नार और गर्ग प्रमुख हैं। नार के पुत्र संकृति के रूचिराधि और रतिदेव पैदा हुए। गर्ग के पुत्र सिनि के वंशज गार्ग्य और सैन्य जन्म से क्षत्रिय होने पर भी ब्राह्मण बन गए। महावीर्य के पुत्र उरक्षय के तीन पुत्र त्राययुर्ण, पुश्करण और कपि थे। कपि ब्राह्मण बने। ब्रहत्क्षात्र के पुत्र सुहोत्र थे और सुहोत्र के पुत्र हस्तिन ने हस्तिनापुर नगर बनाया। हस्तिन के अजामेध, द्विमेध और पुरूमेध पुत्र हुए। अजामेध का
- विल्सन का विष्णु पुराण पृष्ठ 377-380