अध्याय 7. शूद्र कौन थे - क्या शूद्र क्षत्रिय थे? - Page 120

शूद्र कौन थे- क्या शूद्र क्षत्रिय थे?

105

एक पुत्र कण्व था। कण्व का एक पुत्र मेधातिथि तथा दूसरा पुत्र ब्रहदिश था, जिसका पुत्र ब्रहद्वासू, उसका पुत्र अहत्कर्मा, उसका पुत्र जयद्रथ, उसका पुत्र विश्वजीत, उसका पुत्र सेनजित और सेनजित के रूचिराश्व, काश्य, द्रथधनुष और वसाहनु हुए। रूचिराश्व के पुत्र पृथसेन के पार और पार के निप नामक पुत्र हुए। निप के सौ पुत्र हुए जिनमें काम्पल्य का शासक समर प्रमुख था। समर के तीन पुत्र परा, सम्परा और सदाश्व थे। परा का पुत्र पृथु था उसका पुत्र सुकीर्ति उसका पुत्र विभ्रातृ और विभ्रातृ का पुत्र अनुह हुआ। अनुह ने व्यास पुत्र शुक्र की पुत्री कृत्वी से विवाह किया। उससे ब्रह्मदत्त पैदा हुआ। ब्रह्मदत्त के पुत्र विश्वसेन, उसका पुत्र उदकसेन, उसका पुत्र भल्लाट हुआ। द्विमिधा का पुत्र यविनार, उसका पुत्र धृतिमत, उसका पुत्र सत्यकृति, उसका पुत्र धृधनेमि, उसका पुत्र सुपार्श्व, उसका पुत्र सुमति, उसका पुत्र सन्नातिमत, उसका पुत्र कृत थे। जिसे हृण्यनाम से योगदर्शन की शिक्षा दी और उसने 24 संहिताएं रचीं जिनका उपयोग सामवेद का अध्ययन करने वाले पूर्व के ब्राह्मणों ने किया। कृत का पुत्र उग्रयुद्ध जिसने क्षत्रियों के निप वंश को नष्ट कर दिया। उग्रयुद्ध का पुत्र क्षेम्य, उसका पुत्र सुबीर, उसका पुत्र नृपंजय, उसका पुत्र बाहुरथ हुआ। ये पौरव कहलाए। अजामेध की नलिनीनाम की पत्नी थी जिससे नील का पुत्र हुआ, उसका पुत्र शांति, उसका पुत्र सुशांति, उसका पुत्र पुरूजन, उसका पुत्र चकशू, उसका पुत्र हर्याश्व, हर्याश्व के मुदगल, त्रिंजय, वृहदिशु, प्रवीर और कम्पिलय पांच पुत्र हुए। इनके पिता ने कहा कि मेरे पांच (पंच) पुत्र देश की रक्षा करने में सक्षम हैं इसलिए ये पांचाल कहलाए। मुदगल से मौदगल्य ब्राह्मण वंश चला। उसका एक पुत्र भावाश्व भी था, उसकी दो जुड़वा संतान एक पुत्र और एक पुत्री थी, जिनका क्रमशः दिवोदास और अहल्या नाम थे।

** ** ** ** **

दिवोदास का पुत्रा मित्रयु, उसका पुत्र च्यवन, उसका पुत्र सुदास, उसका पुत्र सौदास जिसे सहदेव भी कहते हैं, उसका पुत्र सोमक, जिसके सौ पुत्र थे इनमें जंतु ज्येष्ठ था, पृष्ठ कनिष्ठ था। पृष्ठ का पुत्र द्रुपद उसका पुत्र धृष्टधुम्न, उसका पुत्र दृष्टकेतु था। अजामेघ का एक अन्य पुत्र भी था जिसका नाम रिक्ष था। रिक्ष का पुत्र समवरण, उसका पुत्र कुरू हुआ। कुरू के नाम पर कुरूक्षेत्र का नामकरण हुआ। उसके सुधांशु, परीक्षित तथा अनेक पुत्र हुए। सुधांशु का पुत्र सुहौत्र, उसका पुत्र च्यवन, च्वयन का कितक और कितक का उपरिचार हुआ। उपरिचार (बसु) के ब्रहद्रथ, प्रत्याग्र, कुश्मभ, मावेला, मत्स्य आदि सात पुत्र हुए। ब्रहद्रय का पुत्र कुसाग्र, कुसाग्र का ऋषभ, उसका पुत्र पुष्पावत, उसका पुत्र सत्याधृत, उसका पुत्र सुधन्वा और सुधन्वा का जान्तु हुआ। वृहद्रस्थ के एक अन्य पुत्र भी था जो जरासिंधु के नाम से विख्यात हुआ। जरासिंधु का सहदेव, सहदेव का सोमपायु और सोमपायु का सुरश्रवा हुआ। से मगध के राजा थे।

संक्षेप में तीनों सुदासों की वंशावली निम्न प्रकार है।