अध्याय 7. शूद्र कौन थे - क्या शूद्र क्षत्रिय थे? - Page 121

106 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाड्ख्.,मय

ऋग्वेद में सुदास विष्णु पुराण में सुदास

7-18.22 7-18.23 7-18.25 सगरवंश में पुरू वंश में के अनुसार के अनुसार के अनुसार सुदास सुदास देवव्रत पिजवन दियोदास-पिजवन ऋतुपर्ण बाहवाश्व पिजवन सुदास सुदास सर्वकाम दियोदास सुदास सुदास मित्रायु

सौदास च्यवन

सुदास

मित्रसह सौदास

सोमक

उपरोक्त तालिकाओं से दो बातें स्पष्ट हैंःµ

  1. विष्णु पुराण के सुदास का ऋग्वेद के सुदास से कोई संबंध नहीं है।
  2. महाभारत में चर्चित पैजवन का साम्य ऋग्वेद के सुदास से है।

पिजवन का पुत्र होने के कारण सुदास को पैजवन भी कहा गया है। जिसका दूसरा नाम दिवोदास था। ख्1,

सौभाग्य से मेरा विवरण प्रो. बेबर से मिलता है।

महाभारत के शांतिपर्व के प्रासंगिक श्लोकों पर टिप्पणी करते हुए प्रो. बेबर कहते हैं ख्2, ःµ

‘‘पैजवन की महत्वपूर्ण कथा का वर्णन है। यज्ञ के लिए प्रसिद्ध पैजवन या सुदास ऋग्वेद में विश्वमित्र का संरक्षक और वशिष्ठ का शत्रु बताया गया है। वह शूद्र था।’’

प्रो. बेबर ने दुर्भाग्य से इस अंश का महत्व नहीं समझा। मेरे लिए यही काफी है कि वह भी समझते हैं कि महाभारत का पैजवन और ऋग्वेद का सुदास, दो अलग व्यक्ति न होकर एक है।

  1. ऋग्वेद में सुदास के बारे में वंश शास्त्र में कुछ कठिनाई है, जिसे देवदास और दिवोदास के अंतर को

समान कर सुलझाया जाना चाहिए। यह परिच्छेद 22.23 और 25 के पाठान्तर के कारण हैं जिसके विषय

में शायद किसी ने चिंता नहीं की। चित्रव शास्त्री ने आद्योपांत पिजवन लिखा है। सातवालेकर ने सर्वत्र

पेजवन लिखा है। विल्सन ने 22 और 23 में पैजवन और 25 में पिजवन लिखा है। विल्सन का पाठ

शुद्ध लगता है। यास्क के निरूक्त में पैजवन उपलब्ध है। विल्सन के 25वें परिच्छेद को सही मानने में

कोई कठिनाई नहीं होगी। फिर पिजवन दिवोदास का दूसरा नाम है और पैजवन सुदास का दूसरा नाम

हो सकता है।’’

  1. म्यूर खंड 1, पृष्ठ 366