108 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाड्ख्.,मय
‘‘पार्वत और नारद ने अम्बाष्ठय और अभिषेक किया। अम्बाठय ने सर्वत्र विजय पाई और अश्वमेध यज्ञ किया।’’
‘‘कश्यप ने भुवन के पुत्र विश्वकर्ता का अभिषेक किया। विश्वकर्मा ने संपूर्ण पृथ्वी को जीता और अश्वमेध यज्ञ किया।’’ ‘‘(राजा न होता को सारी पृथ्वी दान में दे दी।)’’ कहा गया है कि पृथ्वी ने विश्वकर्मा की प्रशस्ति मेंं कहाःµ
‘‘हे विश्वकर्मा कोई पुरुष मुझे इस प्रकार ख्1, दान में नहीं दे सकता। तुमने मुझे दान में दिया है। मैं समुद्र में समा जाती हूं। उनका कश्यप को दिया गया वचन व्यर्थ गया।’’
‘‘वशिष्ठ ने पिजवन पुत्र सुदास का अभिषेक किया। उसने समस्त भूमंडल को जीत कर अयवमेध यज्ञ किया।’’
‘‘अंगिरा के पुत्र संवर्त ने मारूत का अभिषेक किया। मारूत ने समस्त भूमंडल जीत कर अश्वमेध यज्ञ किया।’’
उपरोक्त सूची में वशिष्ट द्वारा सुदास के अभिषेक किए जाने का स्पष्ट व विशिष्ट उल्लेख है।
सुदास प्रसिद्ध दश राजन (दस राजाओं के) युद्ध का नायक था। इस युद्ध का वर्णन ऋग्वेद के सातवें मंडल के अनेक सूक्तों में मिलता है। सूक्त 83 में कहा गया हैःµ 4. ‘‘हे इंद्र और वरुण, तुमने अपने घातक शास्त्रों से भेद नामक शत्रु को मारते हुए
सुदास की रक्षा की। युद्ध के अवसर पर त्रित्सुओं की प्रार्थना सुनी जिसने उनके
लिए मेरी पौरोहित्य फलीभूत हुआ होगा।’’
- ‘‘हे इंद्र और वरुण सुदास और त्रित्सु युद्ध द्वारा द्रव्य की प्राप्ति के लिए तुम्हारी
शरण में गए। जब दस राजाओं ने उन पर आक्रमण किया, तुमने उन दोनों (सुदास
और त्रित्सु) की रक्षा की।’’
- ‘‘हे इंद्र और वरुण, दसों अधार्मिक राजा, संगठित होने पर भी सुदास के समक्ष
टिक न सके। द्रव्य युक्त यज्ञ में देवताओं का स्रोत सफल हुआ है। इनके यज्ञ में
समस्त देवता उपस्थित थे।’’
- ‘‘हे इंद्र और वरुण, तुम में से एक युद्ध में शत्रुओं का संहार करता है तथा दूसरा
धार्मिक अनुष्ठानों की सदा रक्षा करता है। हम स्तुति करके तुम्हारा आह्वान करते
हैं, हम पर कृपा करो।’’
सूक्त 33 के अनुसारःµ
‘‘पाशधुम्न के पराभव पर सुदास ने मंदिरों को चढ़ावा दिया। उसे ग्रहण करने के
राजा ने अपने पुरोहित को संपूर्ण भूमि दान में देने का वचन दिया था।