शूद्र कौन थे-क्या शूद्र क्षत्रिय थे?
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इस युद्ध में सुदास के विरुद्ध लड़ने वाले राजा इस प्रकार हैं ख्1, ः- 1. शिन्यु, 2. तुर्वाशा, 3. द्रुह्यु, 4. कवश, 5. पुरू, 6. अनु, 7. मेद, 8. शम्बर, 9. वैकर्ण, 10. वैकर्ण (दूसरा), 11. यदु, 12. मत्स्य, 13. पक्थ, 14. भालना, 15. अलीन, 16. विशानिन, 17. अज, 18. सिनि, 19. शिगृ, 20. यक्षु, 21. मध्यामधि, 22. याद्वा, 23. देवक मन्यामान, 24 च्यमन कवि, 25. सुतुक, 26. उचथ, 27. श्रुत, 28. वृद्ध, 29. मन्यु और 30 पृथ।
स्पष्टतः युद्ध अपने नाम से कहीं बड़ा और भारतीय आर्यों के इतिहास की महत्वपूर्ण घटना रहा होगा। युद्ध का विजेता सुदास अपने समय ख्2, का अनन्यतम नायक कहलाता था तो इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं है। युद्ध का कारण क्या था यह तो ठीक पता नहीं चलता। ऋग्वेद (7.83.7) में सुदास के विरोधी राजाओं को अधर्मी कहा गया है। इस प्रकार संभावना यही है कि यह धर्म युद्ध था।
(चार) सायणाचार्य और लोकोक्ति के अनुसार ऋग्वेद के अधोलिखित मंत्रों के सृष्टा
निम्नांकित राजा गण थेःµ
10.9ः- बितहव्य (भारद्वाज)
10.75ः- अम्बरीश (यात्वविष्ट्र के पुत्र त्रिसरस) के पुत्र सिंधुद्वीप। 10.133ः- प्रियमेघ का पुत्र सिंधुक्षित।
10.134ः- पिजवन का पुत्र सुदास।
10.179ः- युवनास्व का पुत्र मंधातृ।
10-148ः- असीनर के पुत्र सिवि, दिवोदास के पुत्र काशी नरेश प्रतार्धन तथा रोहिदाश्व
के पुत्र वसुमानस को पृथी वैन्य धारक घोषित किया गया है।
उक्त तालिका में सुदास का नाम वैदिक मंत्रों के सृष्टा के रूप में है। (पांच) ऋग्वेद (3.53) के अनुसार सुदास ने अश्वमेध यज्ञ किया थाःµ 9. ‘‘महामुनि देवगण ने जनक के देवों को आकृष्ट किया। विश्वामित्र ने जब सुदास
का यज्ञ संपन्न कराया, तो उन्होंने नदियों के प्रवाह को रोक दिया, इंद्र और कुशिक
प्रसन्न हुए।’’
- ‘‘हे कुशिक, तुम आगे बढ़कर सुदास के अश्व का उत्साहवर्धन करो और उसे राज्य
की समृद्धि के लिए विजय प्राप्त करने के लिए प्रेरित करो। देवराज इंद्र ने वृत्र
का पूर्व, पश्चिम और उत्तर दिशा में विनाश कर दिया है। इसलिए पृथ्वी के पवित्र
स्थलों पर सुदास इंद्र की पूजा करें।’’
- यह सूची चित्रव शस्त्री के प्राची चरित्र कोश पृ. 624 से ली गई। इसमें मतैक्य नहीं है कि क्या ये
सभी राजा थे। सायणाचार्य ने कहा है 13-16 पुरोहितों के नाम हैं। 27-29 के बारे में भी संदेह है। 2. ऋग्वेद में सुदास का 27 बार उल्लेख है। इससे इसकी महत्ता का पता चलता है।