शूद्र कौन थे-क्या शूद्र क्षत्रिय थे?
113
हमें दूसरे प्रश्न से प्रारंभ करना बेहतर होगा। इसके समाधान हेतु हम ऋग्वेद का आश्रय लेते हैं। ऋग्वेद में त्रित्सु, भरत, तुर्वष, द्रहयु, यदु, पुरू और अनु आदि अनेक जातियों का वर्णन है। ऋग्वेद में ही साक्ष्यानुसार सुदास का संबंध पुरू, त्रित्सु और भरत जातियों से था। अस्तु हमें अपनी खोज इन्हीं तीन जातियों तक सीमित रखना श्रेयस्कर होगा।
ऋग्वेद में सुदास और त्रित्सुओं का संबंध इस प्रकार दर्शाया गया हैःµ
मंत्र 1.63.7 में दिवोदास को पुरू गण का राजा कहा गया है।
मंत्र 1.130.7 में दिवोदास पौरव बताया गया है। अर्थात पुरू का वंशज।
मंत्र 7.18.15 के अनुसार सुदास ने त्रित्सुओं के ठिकानों पर धावा बोला। त्रित्सु भाग
खड़े हुए और उनकी संपत्ति सुदास के हाथ लगी। अर्थात सुदास त्रित्सु नहीं बताया
गयाःµ
- मंत्र 7.83.6 के अनुसार सुदास और त्रित्सु दसराजन युद्ध में एक पक्ष थे, लेकिन ये
अलग-अलग दिखाए गए हैं।
- मंत्र 7.35.5 और 7.83.4 में सुदास त्रित्सुओं का राजा बताया गया है। त्रित्सु और
भरत तथा उनके और सुदास के बीच संबंधों के बारे में ऋग्वेद में निम्न साक्ष्य
उपलब्ध हैं।
मंत्र 7.33.6 में त्रित्सु और भरत एक बताए गए हैं।
मंत्र 7.16.4, 6.19 में सुदास के पिता दिवोदास का भरत से संबंध बताया गया
है।
उक्त प्रसंगों से यह स्पष्ट है कि पुरू, त्रित्सु और भरत या तो एक जाति की अलग-अलग शाखाएं थीं अथवा भिन्न जातियां थी। जो कालांतर में एक हो गई। यह असंभव भी नहीं है। यदि हम मान कर चलें कि तीनों जातियां भिन्न थीं, तब स्वाभाविक रूप से यह प्रश्न उठेगा कि सुदास की जाति क्या थी? पुरू और भरतों से सुदास के पिता दिवोदास के संबंध को देखते हुए यह मानना स्वाभाविक हो जाता है कि सुदास का मूलतः या तो पुरू से संबंध था या फिर भरत से और यह कहना कठिन है। यदि सुदास के पिता दिवोदास को भरत माना जाए तो सुदास भी भरत ही माना जाएगा।
अब प्रश्न उठता है कि भरत कौन थे? क्या ये वे हैं जिनके नाम पर इस देश का नाम भरत भूमि पड़ा? यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है क्योंकि अधिकांशतः लोग इस सच्चाई से अवगत नहीं हैं। हिंदू जब भी भारतवर्ष की चर्चा करते हैं उनके मस्तिष्क में दुष्यंत और शंकुतला का पुत्र भरत रहता है वे अन्य किसी भरत के नाम को जानते तक नहीं।