अध्याय 7. शूद्र कौन थे - क्या शूद्र क्षत्रिय थे? - Page 130

शूद्र कौन थे-क्या शूद्र क्षत्रिय थे?

115

असभ्य और जंगली आदिम जातियों को ही शूद्र मान कर चले हैं। इसका कारण यह रहा है कि वैदिक आर्यों की सामाजिक संरचना का पूरी तरह गवेषणा पूर्ण अध्ययन नहीं हुआ। प्राचीन समाज जाति, उप जाति, कुल और गोत्र के आधार पर अनेक छोटे-छोटे समूहों में विभाजित था। अतः यह कहना कठिन है कि शूद्र किस जाति, कुल या वंश का नाम था।

किसी एक कुल के लोग जब एक ही वंश परंपरा के आधार पर किसी अन्य कुल में सम्मिलित हो जाते हैं तो उनका एक बड़ा समुदाय बन जाता है और उनके सामाजिक हित तथा तीज त्यौहार समान होते हैं तो वह एक बिरादरी बन जाती है। यह बंधन कुछ शिथिल होता है और उनके संसर्ग औपचारिक या उठ बैठ से अधिक कुछ नहीं होते। यह बिरादरी भाव नातेदारी में विकसित हो जाता है तो इसे एक विस्तृत समुदाय समझा जाता है। नातेदारी बिना आंशिक विभेद के भी हो सकती है और पूरा कुल दो कुलों का जुड़ाव बन जाता है। ये सभी वर्ग चाहे कुलगत हों बिरादरी से संबंधित हों या नातेदारी के, उनमें एक रिश्ता बन जाता है।

निस्संदेह वैदिक आर्यों में भी ऐसे सामाजिक समुदाय थे। यह नामावलियों से स्पष्ट होता है जैसाकि कि प्रो. सेनार्ट ने बताया है ख्1, ः-

‘‘वैदिक मंत्रों में बाह्य और सामाजिक संबंधों के विषय में अनिश्चय है। हमें उनके विषय में कम से कम इतना पता है कि आर्य समुदाय में अनेक कबीले या जन थे जो कुलों में विभाजित थे। उनमें ‘विशों’ का प्रचलन था। फिर वे परिवारों में विभक्त हो गए। इस संबंध में ऋग्वेद की शब्दावली में कहीं-कहीं अपूर्णता है। परंतु सामान्य तथ्य स्पष्ट है। सजाति और जाति भाई का अथर्ववेद के ‘विश’ शब्द से संकेत मिलता है। जन का व्यापक महत्व है जो कुल का स्वरूप है यही जाति बना। ‘‘व्रा’’, ‘‘वृजन’’, ‘‘व्रज’’, ‘‘व्रत’’ कबीलों के विभाजनों का पर्याय हैं आर्य लोगों के विषय में तत्कालीन युगों के मंत्रों से प्रसंग आए हैं कि ये कबीलों की परंपराओं के संगठनों में विभाजित थे। तत्कालीन नामों की परंपरा से प्रकट होता है कि ये धुमंतु थे।’’

बहरहाल हमारे पास ऐसी कोई सूचना नहीं है कि उपर्युक्त में से क्या कुल हैं, क्या बिरादरी है और उसका किस कबीले से संबध है ख्2, ? इन हालातों में यह नहीं कहा जा सकता कि शूद्र किसी कुल का नाम है या बिरादरी का या किसी कबीले का। फिर भी प्रो. बेबर के विचार बड़े रोचक हैं। वह शतपथ ब्राह्मण के एक कथन (1.1.4.12) का उल्लेख करते हैं कि यज्ञशाला के आह्वान के लिए यजमानों से कहा जाता है? ब्राह्मण

  1. कास्टस इन इंडिया, प्रोफेसर इमाईल सेनार्ट पृष्ठ -192

  2. आर्य कबीला अपने परिवर्तनशील बंधनों के आधार पर बिरादरी लगता है।