अध्याय 7. शूद्र कौन थे - क्या शूद्र क्षत्रिय थे? - Page 131

116 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाड्ख्.,मय

को ‘‘शीघ्र आ’’ क्षत्रिय को ‘‘शीघ्र आ’’ वैश्य को ‘‘शीघ्र आ’’ और शूद्र को ‘‘दूर हट’’ कहा जाता है। प्रो. बेबर ख्1, के अनुसारःµ

‘‘पूरा परिच्छेद अति महत्वपूर्ण है जिससे पता चलता है (रोथ ने अपने जर्नल के प्रथम खंड के पृष्ठ 83 में जो कहा है उसके विपरीत) कि शूद्र आर्यों के यज्ञ में भाग लेते थे। उनकी भाषा समझते थेः हालांकि बोल नहीं पाते थे। बाद की बात से अनुमान होता है कि यह आवश्यक नहीं कि इसका निष्कर्ष यही है। परंतु इसकी बहुत संभावना है और मैं उनकी बात मानने को तैयार हूं कि शूद्र आर्य कबीले के ही थे जो पहले भारत आया।’’

उनके इस निष्कर्ष पर हम यह विचार करने को विवश हैं कि शूद्र आर्य ही थे। संदेह का एक ही मुद्दा है कि क्या शूद्र कोई कबीला था? यह तो असंदिग्ध है कि वे आर्य और क्षत्रिय थे।

  1. म्यूर खंड 1, पृष्ठ -366