अध्याय 8. वर्ण तीन हैं या चार? - Page 132

अध्याय 8

वर्ण तीन हैं या चार?

I

आदिकाल से ही आर्य समुदाय में वर्ण व्यवस्था मौजूद रही है। जिसे सभी हिंदू तथा पश्चिमी विद्वान स्वीकार करते हैं यदि पिछले अध्याय में वर्णित इस आधार को कि शूद्र क्षत्रिय थे, स्वीकार किया जाए तो यह सिद्धांत गलत है। यदि ऐसा है तो कभी केवल तीन ही वर्ण थे, अर्थात ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य। इससे एक समस्या का समाधान हो तो दूसरी समस्या उत्पन्न हो जाती है। पता नहीं इसका महत्व कोई समझेगा या नहीं। यह कहा जाता है कि जब तक यह सिद्ध न हो जाए कि आदिकाल में केवल तीन वर्ण थे तब तक यह नहीं माना जा सकता कि शूद्र क्षत्रिय थे। सौभाग्यवश इसका प्रमाण मौजूद है कि आर्यों में आदिकाल में केवल तीन ही वर्ण थे।

काश मुझे कोई सिद्धांत मिल जाता जिससे में यह समस्या हल करने का वायदा निभा पाता किंतु इससे एक और समस्या हो जाती है। सौभाग्य की बात है इस बारे में मुझे पुख्ता सबूत मिले हैं कि शुरू में आर्यों के केवल तीन ही वर्ण थे।

पहला प्रमाण ऋग्वेद का है। मैं उसी का विश्वास करता हूं। कुछ विद्वानों का मत है कि ऋग्वेद के काल में वर्ण-व्यवस्था नहीं थीं। उनका मत है कि ऋग्वेद में पुरुष सूक्त बहुत समय बाद का क्षेपक है।

यदि यह मान भी लिया जाए कि पुरुष सूक्त बाद का क्षेपक है तब भी यह नहीं माना जा सकता कि ऋग्वेद के समय में वर्ण व्यवस्था नहीं थी। ऋग्वेद के साथ इस व्यवस्था का विरोधाभास है क्योंकि पुरुष सूक्त के अतिरिक्त कई स्थानों में ऋग्वेद में ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य का वर्णन एक साथ आया है। ब्राह्मणों का जिक्र एक वर्ण के लिहाज से पन्द्रह बार और क्षत्रियों का नौ बार आया है, परंतु ‘‘शूद्र’’ का नाम इस अर्थ में कहीं नहीं आया कि वह एक वर्ण का नाम है। यदि किसी विशेष वर्ण का नाम ‘‘शूद्र’’ होता, तो ऋग्वेद में उसका जिक्र अवश्य आता। इससे यहीं परिणाम निकलता है कि ‘‘शूद्र’ नाम का कोई चौथा वर्ण नहीं था।

दूसरा प्रथम तैत्तिरीय और शतपथ ब्राह्मण का है। दोनों ब्राह्मणों में केवल तीन वर्णों