120 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाड्ख्.,मय यजुर्वेद ऋग्वेद सामवेद अथर्ववेद
1 1 3 1 2 2 5 4 3 3 6 3 4 4 4 2 5 5 7 9 6 8 × 10 7 9 × 11 8 10 × 14 9 7 × 13 10 11 × 12 11 12 × 5 12 13 × 6 13 14 × 7 14 6 × 8 15 15 × 15 16$ 16 × 16$ 17 × × × 18 × × × 19 × × × 20 × × ×
21 × × × 22 × × ×
स्थिति यह है कि यदि पुरुष सूक्त प्राचीन होता तो अन्य वेदों में इस तरह की स्वतंत्रता के साथ उसकी काट-छांट का अवसर न होता।
विभिन्न वेदों में पुरुष सूक्त का स्थान भी बहुत महत्व रखता है। इसके अतिरिक्त पुरुष सूक्त ऋग्वेद के मिश्रित भाग में पाया जाता है। यदि यह पुराना होता तो क्या उसके साथ छेड़छाड़ की जा सकती थी? क्या इसमें ऐसी कांट-छांट की जा सकती थी।