अध्याय 9. ब्राह्मण बनाम शूद्र - Page 138

अध्याय 9

ब्राह्मण बनाम शूद्र

इस सिद्धांत के प्रतिपादन से समस्या हल नहीं होती कि शूद्र क्षत्रिय थे और बाद में अपनी स्थिति से गिरकर चौथा वर्ण हो गए। इससे एक अन्य प्रश्न यह उठता है कि वे सामाजिक प्रतिष्ठा से कैसे च्युत हुए?

यह समस्या नई है। यह पहले नहीं उठी। इसका उत्तर पुस्तकों से नहीं मिल सकता। मैंने ही यह प्रश्न पहली बार उठाया है। यह प्रश्न शूद्रों के विषय में मेरे सिद्धांत पर आधारित है। इसका संतोषजनक उत्तर देने का दायित्व भी मेरा है। मुझे विश्वास है कि मैं संतोषजनक उत्तर दे सकता हूं। मेरा उत्तर यह है कि शूद्रों तथा ब्राह्मणों के संघर्ष के कारण शूद्र नीचे आ गए। इस बात के पर्याप्त प्रमाण मिलते हैं।

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शूद्र राजा सुदास तथा वशिष्ठ में, जो ब्राह्मण थे, विवाद हुआ। परंतु इस विवाद का पुस्तकों में जो वृतांत दिया गया है यह भ्रामक है। मैंने उसे स्पष्ट और व्यवस्थित ढंग से सुलझाने का प्रयत्न किया है।

विवाद समझने से पहले वशिष्ठ और विश्वामित्र का संबंध जानना आवश्यक है। वशिष्ठ तथा विश्वामित्र में सर्वदा विरोध और शत्रुता रही है। कोई ऐसी घटना नहीं है जिसमें यदि उन दोनों में से कोई एक पक्ष में हो तो दूसरा दूसरे पक्ष में न हो। मैं कुछ घटनाओं का उल्लेख करना चाहूंगा।

यह किस्सा हरिवंश पुराण ख्1, में इस प्रकार हैःµ

‘‘इस बीच वशिष्ठ सत्यव्रत के पिता के गुरू होने के कारण अयोध्या नगर और राजमहल का प्रबंध करने लगा। परंतु मूर्खता वश अथवा दुर्भाग्यवश वशिष्ठ के प्रति सत्यव्रत का क्रोध और बढ़ता गया। सत्यव्रत को उसके पिता द्वारा राज्याधिकार से वंचित कर देने पर वशिष्ठ ने उसका साथ नहीं दिया। सत्यव्रत ने कहा था कि विवाह सप्तपदी

  1. म्यूर खंड 1 पृष्ठ 377-378