अध्याय 9. ब्राह्मण बनाम शूद्र - Page 146

ब्राह्मण बनाम शूद्र

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ऐसा सुन कर उन लोगों ने राजा को शाप दिया कि चांडाल हो जा। इस शाप के असर से राजा की सूरत एक चांडाल की हो गई। तब अपने दुर्भाग्य पर पश्चाताप करता हुआ राजा विश्वामित्र के पास गया। विश्वामित्र को उस पर दया आई। उन्होंने वादा किया कि हम एक ऐसा यज्ञ कराएंगे, जिससे इसी चांडाल की सूरत से तू स्वर्ग जा सकेगा। चूंकि तू कौकिश के पास आया है, अतः स्वर्ग तेरे हाथ में है। विश्वामित्र ने यज्ञ की सारी तैयार करनी की आज्ञा दी। यह भी कहा कि संपूर्ण महार्षियों और वशिष्ठ के पुत्रों को भी नियंत्रण दो। विश्वामित्र के शिष्यों ने आकर संदेश दिया कि वशिष्ठ को छोड़कर सब ब्राह्मण इकट्ठे हो रहे हैं। वशिष्ठ के सौ पुत्रों ने जो कठोर शब्द कहे हैं। उनको आप सुनें। उन्होंने कहा - ‘‘जिस यज्ञ का करने वाला चांडाल और कराने वाला क्षत्रिय हैं, उसमें देवता और ब्राह्मण कैसे सम्मिलित हो सकते हैं? चांडाल का अन्न खाकर ब्राह्मणों को स्वर्ग की प्राप्ति कैसे हो सकती है? विश्वामित्र ने यह सुनकर क्रोधवश शाप दिया कि वशिष्ठ ने सब लड़के भस्म हो जाएं और सात जन्म तक अस्पृश्य के घर जन्म लें। वशिष्ठ को उन्होंने शाप दिया - निषाद हो जाओ।’’ जब शाप फलीभूत हो गया, तब उन्होंने यज्ञ कराया। अन्य ब्राह्मणों ने भी ऋषि के भय से यज्ञ में भाग लिया। याज्ञिप विश्वामित्र थे और ऋत्विज अन्य ब्राह्मण थे।’’

विश्वामित्र और वशिष्ठ की लड़ाई में सुदास ने भी भाग लिया। सुदास के पुरोहित वशिष्ठ थे। वशिष्ठ ने उसका राज्यभिषेक कराया था। वशिष्ठ ही ने दस राजाओं पर विजय प्राप्ति में उसकी सहायता की थी। इस पर भी सुदास ने वशिष्ठ को इस पद से निकाल कर विश्वामित्र को नियुक्त कर दिया। विश्वामित्र ख्1, ने यज्ञ कराया। इससे विश्वामित्र और वशिष्ठ की शत्रुता बढ़ गई। एक और घटना घटी, जिससे यह शत्रुता और भी बढ़ गई। सुदास ने वशिष्ठ के ज्येष्ठ पुत्र शक्ति को अग्नि में डलवा दिया, जिससे वह भस्म हो गया। यह कथा सात्यायन ख्2, ब्राह्मण में लिखी है, लेकिन उसमें ऐसे उत्पीड़न का कोई कारण नहीं बताया है। परंतु सदगुरू ने ऋग्वेद की कात्यायन अनुक्रमणिका की टीका में कुछ प्रकाश डाला है। सदगुरू शिष्य ख्3, का कहना है कि सुदास ने एक यज्ञ किया। यहां पर विश्वामित्र और शक्ति का शास्त्रार्थ हो गया। शक्ति ने उन्हें मूक बना दिया। विश्वामित्र हार गए।

ऐसा प्रतीत होता है कि विश्वामित्र ने अपमान का बदला लेने के लिए सुदास से शक्ति को अग्नि में डलवा दिया। इस बात पर वशिष्ठ तथा सुदास की शत्रुता तो होनी

  1. इसका प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है। परंपराओं के अनुसार यह ठीक था जो ऋग्वेद पर आधारित है। ऋग्वेद

3.53.9, यास्क निरूक्त (2-24) से इसकी पुष्टि होती है, जहां उन्होंने कहा है, वे सब एक कथा

सुनाते हैं। ऋषि विश्वामित्र पैजवन पुत्र सुदास के पुरोहित थे।

  1. म्यूर खंड 1, पृष्ठ 328 के उद्धत, ऋग्वेद अनुक्रमणिका में सायण के संदर्भ में संबद्ध है।
  2. यह सायण के सूक्त 53, मंत्र 15 और 16 की भूमिका से उद्धत है जो ऋग्वेद के तीसरे मंडल में है।

उद्धरण म्यूर खंड 1, पृष्ठ 343 से।

  1. म्यूर खंड 1, पृष्ठ 328