अध्याय 9. ब्राह्मण बनाम शूद्र - Page 148

ब्राह्मण बनाम शूद्र

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पुरूरवा इला का पुत्र था। उसका राज्य तेरहों द्वीपों मेंं था परंतु राज्य के मद में उसने ब्राह्मणों से बैर मोल ले लिया, और उनके आभूषण लूट लिए। ब्रह्म लोक से आकर सनतकुमार ने उसे समझाया पर वह न माना। उसका विवेक सत्सा के कारण नष्ट हो गया था। तब ऋषियों ने उसे शाप देकर मार डाला।’’ तीसरी कथा नहुष की है। नहुष पुरूरवा का पौत्र था। नहुष के साथ ब्राह्मणों के टकराव का वर्णन महाभारत में दो जगह है। एक वन पर्व और एक उद्योग पर्व में। उद्योग पर्व ख्1, का वर्णन इस प्रकार हैःµ

वृत्रासुर को मारने के बाद इंद्र ब्रह्म हत्या के डर से पानी में जाकर छिप गए। इससे बड़ा हाहाकार मचा। तब ऋषि और देवताओं ने नहुष से प्रार्थना की कि आप कुछ दिनों के लिए देवताओं के राजा बन जाएं। पहले तो नहुष ने अपनी असमर्थता प्रकट की, फिर बाद में राजी हो गए। राजा नहुष बहुत धर्मात्मा था, परंतु इंद्र बनने के बाद वह बहुत कामी हो गए। उन्होंने इंद्राणी को देखा। वह इंद्राणी की प्राप्ति की अभिलाषा करने लगे। इंद्राणी ने अंगिरा बृहस्पति की शरण ली। उन्होंने इंद्राणी की रक्षा का वचन दिया। नहुष इस पर अप्रसन्न हुए, परंतु देवताओं ने समझाया कि परस्त्री गमन पान है। किन्तु नहुष ने एक न सुनी।

उन्होंने कहा - ‘‘इंद्र ने जब अहिल्या के साथ भोग किया था और बहुत अत्याचार किए थे तब आप लोगों ने इंद्र को क्यों नहीं रोका। नहुष के जिद करने पर देवतागण इंद्राणी को लेने गए, परंतु बृहस्पति ने उसे नहीं जाने दिया। बृहस्पति की सलाह से इंद्राणी ने कुछ समय मांगा, ताकि यह पता चल जाए कि इंद्र कहां हैं? इंद्राणी अपने पति की

खोज में निकल पड़ी। उपाश्रुति की सहायता से पता चला कि इंद्र हिमालय के उत्तर में एक झील के बीच कमल दंड में रह रहे हैं। इंद्राणी ने इंद्र से नहुष के दुर्विचारों का वर्णन किया और प्रार्थना की कि आप अपने राज्य में वापस आएं और मेरी रक्षा करें। इंद्र नहुष की शक्ति से डरते थे। उन्होंने तुरंत आने से इंकार कर दिया। उन्होंने इंद्राणी को एक उपाय बताया कि वह कहे कि नहुष यदि ऋषियों के कंधे पर पालकी रखवा कर आएं तो इंद्राणी उसके साथ भोग विलास को राजी हो जाएगी। इंद्राणी ने वैसा ही संदेश नहुष के पास भिजवा दिया कि एक ऐसी अदभुत पालकी जिसका न तो विष्णु ने, न रूद्र और न ही असुरों ने प्रयोग किया हो और जिसे ऋषि मुनि मेरे लिए उठाकर लाएं तभी मैं आपके साथ सहवास करूंगी।’’ नहुष ने सोचा कि चाहूं तो ब्रह्मांड नष्ट हो जाए, तब सप्तर्षि और ब्राह्मणों को मेरी पालकी ले जाने में क्या हर्ज है। अतएव नहुष की आज्ञा से सब ऋषिगण उसकी पालकी लेकर चले।

पालकी ले जाते हुए ऋषियों ने नहुष से पूछा कि क्या वह उन ब्राह्मण ग्रंथों का आदर करते हैं जिनके मंत्र राजा के लिए बलि के समय गाए जाते हैं, राजा ने कहा, ‘‘नहीं’’ उससे नहुष का ऋषियों से विवाद हो गया और उसने ऋषियों के सिर पर लात

  1. म्यूर, खंड 1, पृष्ठ 310-313