अध्याय 10. शूद्रों का पतन - Page 168

शूद्रों का पतन

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लिया जाए ख्2, तो यह कहां सिद्ध होता है कि शिवाजी क्षत्रिय थे। शिवाजी के क्षत्रिय होने की बात तो दूर रही यह प्रश्न आता है कि क्या सिसोदिया क्षत्रिय वंश के थे? इसमें पर्याप्त संदेह है कि राजपूत प्राचीन आर्यों के दूसरे वर्ण क्षत्रियों के वंशज हैं। एक मत यह है कि राजपूत भारत के आक्रांतता हूणों के वंशज हैं, तो राजपुताना में बसे गए थे। ब्राह्मणों ने मध्यभारत में बौद्ध धर्म को कुचलने और नष्ट करने के उद्देश्य से इन्हेंं अग्नि संस्कार द्वारा क्षत्रिय पद दे दिया। अतः यह अग्नि, कुल क्षत्रिय कहलाएं। इस मत से अनेक विद्वान शोधकर्ताओं ने सहमति प्रकट की है। क्रिसेंट स्मिथ कहते ख्1, हैंः-

‘‘यह बात प्रमाणित रूप से सिद्ध हो चुकी है कि स्थानीय राजाओं से हुए युद्धों में राजपुताना और गंगा की घाटी में विदेशी आक्रमणकारी पूर्णरूपेण नष्ट नहीं हुए थे और जो बचे वे स्थानीय समाज में घुल मिल गए और अपने पूर्वज शर्कों की भांति हिंदू धर्म और हिंदू समाज में मिल कर ‘‘हिंदू’’ बन गए थे। विदेशी विजेताओं को ब्राह्मणों द्वारा क्षत्रिय अथवा राजपूत कहकर हिंदू धर्म में शामिल कर लिया गया। यह निर्विवाद सत्य है कि पांचवीं और छठी सदी से भारत में आई इन्हीं जातियों में से उत्तरी भारत में अनेक बर्बर जातियों के सरदार परिवार तथा अनेक प्रसिद्ध राजवंश पनपे। उनके सैनिक आदि गुजर जैसी जाति बन गए, जिनकी हैसियत कुछ कम है। इसी प्रकार दक्षिण के गौंड, भर, खारवा, चंदेल, राठौर, गहरवाड़ तथा अन्य प्रसिद्ध राजपूत वंश बन गए। ये अपना वंश सूर्यवंश और चन्द्रवंश से बताते हैं।

विलियम क्रुक का कहना ख्2, हैः-

हाल ही खोजों ने राजपूतों की उत्पत्ति पर यथेष्ठ प्रकाश डाला है। वैदिक क्षत्रियों और मध्यकालीन राजपूतों की खाई को पाटना असंभव है। यह निश्चित हो गया है कि बहुत से राजपूत वंशों की उत्पत्ति का समय शकों और कुषाणों अथवा सन् 480 ई. के आसपास गुप्त साम्राज्य का ध्वंश करने वाले श्वेल हूणों के आक्रमण काल से प्रारंभ होता है। गुर्जर जातियों ने हिंदू धर्म अपना लिया, जिसमें से कालांतर में राजपूत वंश निकलें। ब्राह्मणों का प्रभुत्व स्वीकार कर लेने पर इन्हें रामायण और महाभारत के वीरों से जोड़ दिया गया। इस प्रकार राजपूतों का इतिहास बना और इसका कल्पित आरंभिक वंश सूर्य और चन्द्र से संबद्ध कर दिया गया। इन नव क्षत्रियों की सामाजिक प्रतिष्ठा एवं श्रेष्ठता के लिए यह आवश्यक था कि कुछ अनुकूल पड़ने वाली कथाओं की रचना की जाए। कथा के अनुसार शुद्धिकरण या प्राचीन ऋषियों के आह्वान पर वैदिक संस्कारों से चार अग्निकुल क्षत्रिय-परमार, परिहार, चालुक्य और चौहान उत्पन्न हुए। इन अग्निकुल क्षत्रियों ने मध्यभारत में बौद्ध धर्म तथा अन्य मत मतांतरों के दमन में ब्राह्मणों की सहायता की।’’

  1. सी. वी. वैद्यः हिस्ट्री आफर मेडिवयल इंडिया खंड 2, पृष्ठ 8

  2. सी. वी. वैद्यः हिस्ट्री आफर मेडिवयल इंडिया खंड 2, पृष्ठ 9