शूद्रों का पतन
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आक्सेन्डन ने भी अपनी डायरी (18 मई से 13 जून) में लिखा है कि शिवाजी को स्वर्ण से तोला गया था। उनका वजन 16,000 होन था, यह रकम एक लाख होन के साथ ब्राह्मणों में दक्षिणा के रूप में बांट दी गई थी।
उपरोक्त डच रिकार्ड के मतानुसार ब्रात्य संस्कार गाघभट्ट को 7,000 होन, ब्राह्मणों तथा अन्यों को 17,000 होन मिले। पांच जून को शिवाजी ने गंगाजल में स्नान किया और प्रत्येक उपस्थित ब्राह्मण को 100 होन भेंट किए।’’
गाघभट्ट को जो रकम दी गई क्या वह मात्र दक्षिणा ख्1, थी? ऐसा कहा जाता है कि गाघभट्ट को यथेष्ठ पारिश्रमिक नहीं मिल पाया। उससे अधिक तो मंत्रियों को मिला। इस संबंध में दो बातें याद रखने योग्य हैंःµ
- स्वयं मंत्रियों ने शिवाजी को राज्याभिषेक पर बहुमूल्य भेंट ख्2, दी। प्रधानमंत्री मोरोपंत
पिंगले ने 7,000 होन तथा अन्य दो मंत्रियों ने 5,000-5,000 होन भेंट किए। मंत्रियों
को दिए गए उपहारों में से शिवाजी को दी गई भेंट कम कर दी जाए तो शिवाजी
द्वारा मंत्रियों को दिए गए उपहार अल्पमात्र ही रह जाते हैं।
- शिवाजी के मंत्री उन्हेंं शूद्र मानते थे। अतः वे राज्याभिषेक के विरोधी थे। इसमें कोई
आश्चर्य नहीं यदि कहा जाए कि शिवाजी ने उनका मुंह बंद रखने के लिए बड़ी-बड़ी
भेंट उन्हें दी थी। अतः शिवाजी द्वारा मंत्रियों को दिए गए द्रव्य को आधार मानकर
नहीं कहा जा सकता कि गाघभट्ट को दक्षिणा से अधिक नहीं मिला। वास्तविकता
यह है कि गाघभट्ट से स्वयं इतनी कलाबाजियां खाई कि उन्हें दी गई दक्षिणा
रिश्वत कही जा सकती हैं।
शिवाजी के राज्याभिषेक में महाराष्ट्र के कायस्थ शिवाजी के व्यक्तिगत सचिव बालाजी आवाजी की प्रमुख भूमिका रही। बालाजी ने सर्वप्रथम शिवाजी के पूर्व वृतांत के साथ तीन ब्राह्मणों ख्3, को बनारस से गाघभट्ट को लिवालाने भेजा। गाघभट्ट ने संदेशावाहकों को एक पत्र के साथ वापस भेज दिया जिसमें शिवाजी को शूद्र बाते हुए राज्याभिषेक के अयोग्य ठहराया गया था। बालाजी ने शिवाजी के क्षत्रिय होने का प्रमाण एकत्र करने का कदम उठाया। यह एक ऐसी वंशावली प्राप्त करने में सफल हुआ जिसमें शिवाजी को मेवाड़ के सिसोदिया शासकों का वंशज बताया गया था। इस प्रमाण के साथ एक कायस्थ संदेशवाहक ख्1, को पुनः गाघभट्ट के पास भेजा गया। गाघभट्ट रायगढ़ आए और
- यह नहीं सोचना चाहिए कि गाघभट्ट को केवल एक लाख रुपए ही दक्षिणा में प्राप्त हुए। उसे इसके
अतिरिक्त 7,000 होन या 21,000 रुपए व्रात्य संस्कार में मिले, व्रात्य में प्राप्त हुए। फिर उसे सोना तथा
अन्य वस्तुएं भेंट स्वरूप मिलीं जिनके वजन से शिवाजी को तोला गया था।
वैद्य वही, पृष्ठ 247
ये हैं केशव भट्ट, डालचंद भट्ट और सोमनाथ भट्ट।