अध्याय 11. संधि की कथा - Page 179

164 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाड्ख्.,मय

  1. ब्राह्मण को धमकाना, पीटना, धक्का देना अथवा उसके शरीर से रक्त निकालना

अपराध है।

  1. कुछ अपराधों में ब्राह्मण को अन्य वर्णों की अपेक्षा कम दंड दिया जाए।

  2. वादी यदि ब्राह्मण नहीं है तो राजा ब्राह्मण को साक्ष्य के लिए न बुलाए।

  3. यदि किसी स्त्री के दस गैर ब्राह्मण पति हों और एक ब्राह्मण उससे विवाह कर ले

तो वह ब्राह्मण की भार्या होगी न कि एक राजन्य अथवा किसी वैश्य ख्1, की जिससे

उसने विवाह किया हुआ है।

ब्राह्मणों के इन विशेषाधिकार दावों पर विचार करते हुए श्री काणे ख्2, कहते हैंः-

‘‘ ब्राह्मणों को अन्य विशेषाधिकार भी प्राप्त थे। यथा भिक्षाटन के लिए अन्य लोगों के घर में बिना रोक-टोक प्रवेश करना, कहीं से भी ईंधन, फूल, पानी आदि का संकलन चोरी नहीं है। पराई स्त्री से निर्द्वद्वं बातचीत करना, बिना कर दिए सबसे पहले नदी पार करना, व्यवसाय के लिए प्रयुक्त नावों पर चुंगी न देना तथा यात्रा के थके भूखे होने पर किसी भी खेत में से दो गन्ने या कंदमूल ले लेना।’’

निस्संदेह कालांतर में इन अधिकारों में और भी वृद्धि हुई। यह कहना कठिन है कि संघर्ष के समय तक ब्राह्मणों को क्या क्या सुविधाएं मिल चुकी थीं। किन्तु यह निश्चित है कि उपरोक्त सूची में क्रम संख्या 1,2,3,8 और 14 पर अधिकार किसी भले ओर स्वाभिमानी व्यक्ति समुदाय को क्षुब्ध करने के लिए बहुत काफी थे।

जहां तक क्षत्रिय राजाओं की बात है वे इन शर्तों को कैसे मान लेते। यहां हम यह न भूले कि जिन राजाओं का ब्राह्मणों से टकराव हुआ उनमें से अधिकांश सूर्यवंशी थे ख्3, ।

विद्याध्ययन गौरव और वैवाहिक प्रकृति में चंद्रवंशी क्षत्रियों से शक्ति और आत्म गौरव में भिन्न थे। चंद्रवंशी ब्राह्मणों के प्रभुत्व को स्वीकार कर उनके दास बन गए। सूर्यवंशी क्षत्रिय विद्या और ज्ञान में ब्राह्मणों से उत्तम थे, अनेक तो वैदिक मंत्रों से स्रष्टा राजर्षि थे। उन्होंने ब्राह्मणों की चुनौती दी।

  1. आदेश (14) का काणे ने उल्लेख नहीं दिया है। यह अथर्ववेद (5.17.89) में है। म्यूर खंड 1, पृष्ठ

280

  1. म्यूर खंड 1, पृष्ठ 153-54

  2. केवल पुरुरवा और नहुष चंद्रवंशी थे जैसा कि निम्न वंशावली तालिका से विदित होता हैः-

सोम=तारा

बुद्ध=इला

पुरुरवा=उर्वशी

अयुश=नहुष

यदि यह बात ध्यान रखी जाए कि पुरुरवा की माता मनुवैवस्वत की पुत्री थी तो पता चलता है कि ये

भी उन सूर्यवंशी क्षत्रियों की संतान थी जिनका ब्राह्मणों से संघर्ष हुआ।