अध्याय 11. संधि की कथा - Page 183

168 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाड्ख्.,मय

क्षत्रियोंच्छेद के आपके प्रण का क्या हुआ जो इस सभा में डींग हांक रहे हैं? क्या इस समय पृथ्वी सैकड़ों क्षत्रियों के वंशों से पादाक्रांत नहीं है। यह सुनते ही परशुराम ने शस्त्र निकाल लिया। तब सैंकड़ों क्षत्रियों का, जो परशुराम के क्रोध से बच गए थे और शक्तिशाली राजाओं के रूप में उभर आए थे, सब का संहार कर दिया। यहां तक कि बच्चों, गर्भिनी स्त्रियों के गर्भ में भ्रूण को भी क्षत्रियों का पृथ्वी से संपूर्ण समाप्त किए जाने के बाद राम ने अश्वमेघ यज्ञ के सम्पन्न होने पर कश्यप को यज्ञ की दक्षिणा दी।

संघर्ष कथा के उपरांत महाभारत का रचनाकार संधि की कहानी इस प्रकार कहता है ख्1,

‘‘जन्मदग्नि पुत्र परशुराम पृथ्वी पर इक्कीस बार क्षत्रियों का संहार करने के पश्चात महेन्द्र पर्वत पर तप करने लगे। क्षत्रिय विधवाओं को संतति की कामना हुई। वे ब्राह्मणों के पास आई। निष्काम ब्राह्मणों ने उनके साथ संभोग किया। वे गर्भिनी हुई और कालांतर में उन्होंने वीर पुत्रों और पुत्रियों को जन्म दिया। इन्हीं से क्षत्रिय वंश चला। इस प्रकार ब्राह्मणों और क्षत्रियों के मिश्रण से क्षत्रिय वंश की वृद्धि हुई। तभी से ब्राह्मणेत्तर जातियों का उदय हुआ।

ब्राह्मण क्षत्रिय विग्रह और संधि की उपरोक्त कथाओं में उन क्षत्रिय राजाओं को जिन्होंने ब्राह्मणों के विशेषाधिकारों के विरुद्ध युद्ध की घोषणा की थी, का कोई उल्लेख नहीं है। आइए अब हम उनकी ख्2, संधि कथाओं की ओर लौट चलें ताकि विषयांतर न हो सके। पहला वृतांत सुदास पुत्र ख्3, कल्माषपाद का है। महाभारत ख्4, के आदि पर्व में यह वृतांत कहानी के इस भाग में कल्माषपाद तथा वशिष्ठ के बीच की जिस शत्रुता का उल्लेख है, उसका वर्णन ख्5, पहले ही हो चुका है। संधि कथा का यह भाग इस प्रकार हैः-

शक्ति की विधवा पत्नी अदृश्यन्ति ने अनेक पर्वतों और देशों के भ्रमण में अपने ससुर वशिष्ठ का अनुगमन किया। वशिष्ठ को उनके गर्भ से वेदोच्चारण सुनाई दिया। अतः वंश वृद्धि की आज्ञा से प्राणांत का विचार किया। अदृश्यन्ति के गर्भ से पाराशर ने जन्म लिया। एक बार राजा कलमाशपाद ने वन में वशिष्ठ और अदृश्यन्ति को निगलने का असफल प्रयास किया जिसे वशिष्ठ ने भभक कर रोका। मंत्राहूत जल के छींटे मार कर राजा को बारह वर्ष के शाप से मुक्त कर दिया। शाप मुक्त राजा ने वशिष्ठ की अभ्यर्थना की - हे उत्तम ऋषि मे वह सौदास हूं जिसके आप पुरोहित हैं। मैं आपकी प्रसन्नता के निमित्त क्या कर सकता हूं। सेवा बताएं।’’

  1. म्यूर खंड 1, पृ. 451-52

  2. मैं निश्चित नहीं हूं कि कथा में जिन राजाओं का उल्लेख है, क्या वे अध्याय IX में वर्णित हैं। मैंने

उनका संदर्भ इसलिए दिया है कि वे इक्ष्वाकु वंश से हैं।

  1. यद्यपि यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि वह कौन सा सुदायस था फिर भी विवरण के अनुसार वह

पैजवन सुदास सिद्ध होता है।

  1. म्यूर खंड 1, पृ. 415-418

  2. देखें अध्याय 9