अध्याय 11. संधि की कथा - Page 186

संधि की कथा

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गया है और ऐसा क्यों? इसका एक मात्र उत्तर यही है कि ब्राह्मणों का अपने शत्रु (शूद्र स्त्री) के बच्चों के साथ बदले की भावना से की गई दुरभिसंधि है।

  1. मनुस्मृति के अनुसार देखिएःµ

तालिका में छः अनुलोम संततिया हैंःµ

पिता माता संतान का नाम

ब्राह्मण क्षत्रिय मूर्धाविसिक्त

ब्राह्मण वैश्य अम्बष्ट

ब्राह्मण शूद्र निषाद

क्षत्रिय वैश्य माहिष्य

क्षत्रिय शूद्र उर्ग

वैश्य शूद्र करण

अब प्रतिलोम ख्1, पर विचार करते हैं। यद्यपि मनु ने इन्हें नीच बताया है तथापि, सभी प्रतिलोम घृणित नहीं हैं। आयोगव और क्षत्तार के अधिकारों और सुविधाओं के संबंध में विशेष छूट दी गई है। किंतु चांडाल के लिए कठोर दंड का प्रावधान किया गया है। इस संबंध में मनुस्मृति के उद्धरण प्रस्तुत हैंः-

मनुस्मृति (10.48)ः आयोगव का व्यवसाय बढ़ईगिरी होगा।

मनुस्मृति (10.49) क्षत्तार की जीविका बिलों में रहने वाले जानवरों को पकड़ना और मारना होगा।

उनके लिए केवल नीचे उद्यम करने को बताया गया है। आइए, अब चांडाल के विषय में मनुस्मृति से तुलना करें।

  1. गौतम धर्म सूत्र (4-21) के अनुसार प्रतिलोम 6 प्रकार के होते हैंः-

पिता माता संतान का नाम

शूद्र ब्राह्मण चांडाल शूद्र क्षत्रिय क्षत्तार

शूद्र वैश्य आयोगव वैश्य ब्राह्मण सूत

वैश्य क्षत्रिय वैदेहिक क्षत्रिय ब्राह्मण मागध