अध्याय 11. संधि की कथा - Page 187

172 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाड्ख्.,मय

चांडाल, सुअर, मुर्गा, कुत्ता, रजस्वला स्त्री और नपुंसक भोजन करते हुए ब्राह्मण को न देखें। (मनुस्मृति-3.239)

कोई व्यक्ति जाति से पतित, चांडाल, पुलकस, मूढ, घमंडी, नीच और अंतवसायिओं के साथ न रहे।’’ (4-79)

चांडाल, राजस्वला स्त्री, पतित, शव या इनको छूने वाले व्यक्ति से छू जाने पर स्नान करने से शुद्धि हो जाती है (5-85)

मनु ने आदेश दिया है कि कुत्ते द्वारा मारे गए जंगली पशु तथा चांडाल आदि दस्युओं तथा किसी मांसाहारी पशु के आखेट का मांस पवित्र होता है। (5.131)

एक वर्ष की अवधि में दुबारा अपराध करने का दंड दुगना होगा व्रात्य अथवा चांडाल स्त्री से संभोग करने का यही दंड है (8.373)

यदि कोई व्यक्ति मूर्खता से अन्य जाति की वृद्ध स्त्री से संपर्क रखता है तो उससे चांडाल की तरह घृणा करनी चाहिए (9.87)

चांडाल और श्वपच गांव के बाहर रहे हों अपपात्र। कुत्ते और गधे ही उनकी संपत्ति मात्र हैं (10.51)

अच्छे और बुरे का ज्ञान होने पर भी भूख से व्याकुल विश्वामित्र ने चांडाल द्वारा दिया गया कुत्ते का मांस खाया (10.108)

ब्राह्मण को यज्ञ के लिए कभी भी शूद्र से धन नहीं मांगना चाहिए क्योंकि ऐसे ब्राह्मण मृत्योपरांत चांडाल के घर ही जन्म लेते हैं। (11.24)

यदि कोई ब्राह्मण अनजाने में चांडाल अथवा नीच जाति की स्त्री से संभोग कर ले अथवा उसका भोजन ग्रहण कर ले अथवा उसकी दक्षिणा स्वीकार कर ले तो वह पतित हो जाता है। जानकर ऐसा करने पर वह उसी की जाति का हो जाता है - (11.175)

ब्राह्मण का वध करने वाला कुत्ता, सुअर, गधा, ऊंट, गाय, बकरी, भेड़, मृग, पक्षी, चांडाल और पुक्कस की योनि में जन्म लेता है। (12.55)

आयोगव, चांडाल और क्षत्तार सभी प्रतिलोम हैं। फिर अकेले चांडाल को ही अप्रतिष्ठित या कलंकित क्यों ठहराया गया है। मात्र इसलिए कि वह ब्राह्मणों द्वारा शूद्र स्त्री की संतति है। वस्तुतः यह बदले की ही भावना है।

इससे निस्संदेह यह सिद्ध हो जाता है कि ब्राह्मणों और शूद्रों में कभी सुलह हुई ही नहीं।