अध्याय 1. शूद्रों की गूढ़ समस्या - Page 30

शूद्रों की गूढ़ समस्या

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प्रतिपादित किया। उसने कहा कि संसार की समृद्धि के लिए ईश्वर ने ब्राह्मण को अपने मुख से, क्षत्रिय को भुजाओं से, वैश्य को जंघाओं से और शूद्र को पैरों से पैदा किया है। ख्1, इस तरह ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य द्विज वर्ण हैं अर्थात इनका जन्म दो बार होता है और शूद्र का केवल एक बार ही जन्म होता है। ख्2,

इस प्रकार मनु ने अपने पूर्ववर्ती शास्त्रकारों का अनुसरण किया। यही नहीं उसने एक और व्यवस्था दे दी और कहाः- वेद ही धर्म का एकमात्र और अंतिम आधार है। ख्3,

इस बात को ध्यान में रखते हुए कि ‘‘पुरुष सूक्त’’ वेद का अंग है, यह चरितार्थ करना कठिन नहीं हो सकता कि मनु ने पुरुष सूक्त में प्रतिपादित चातुर्वर्ण्य के सामाजिक आदर्श को ईश्वरीय आदेश और विधान तथा असंदिग्धता की परिधि में आवेष्टित कर दिया जो पहले नहीं थी।

II

पुरुष सूक्त का समीक्षात्मक विश्लेषण बहुत आवश्यक है। सभी हिंदू यह मानते हैं कि पुरुष सूक्त अनुपम है। निस्संदेह यह दावा बहुत बढ़ा-चढ़ा कर किया गया है। यह उस समय किया गया होगा जब मानव मस्तिष्क विकास की आदिम अवस्था में था और उसमें आधुनिक युग की तरह परिणामों पर विचार करने की क्षमता नहीं थी। परंतु यह दावा सरलता से स्वीकार किया जा सकता है बशर्ते कि यह समझा जाए कि पुरुष सूक्त को अनुपम क्यों कहा जाता है।

पुरुष सूक्त को अनुपम मानने का प्रमुख आधार सामाजिक संगठन का आदर्श है अर्थात चातुर्वर्ण्य का आदर्श अनुपमान है। क्या पुरुष सूक्त को अनुपम मानने का यह पर्याप्त आधार है? यदि वर्गहीन समाज की रचना का विधान होता तो निश्चय ही पुरुष सूक्त अनुपम माना जाता। पर पुरुष सूक्त में क्या है? इसमें वर्णभेद वाले समाज का उपदेश है। क्या इसे अनुपम माना जा सकता है? इसका स्वीकारात्मक उत्तर केवल कोई राष्ट्रवादी और देशभक्त ही दे सकता है।

वर्ण व्यवस्था का अस्तित्व तो वस्तुतः प्रत्येक समाज की शर्त है अनिवार्यता जो आदिम युगीन है। यह स्थिति तो संसार भर में है वहां भी जहां का समाज अपेक्षाकृत आधुनिक है। इस दृष्टि से पुरुष सूक्त में क्या अपूर्वता या नवीनता हो सकती है जबकि यह भारतीय आर्य समाज में विद्यमान वर्ग को स्वीकार करने के सिवाय और कुछ नहीं है।

इसके होते हुए भी अन्य कारणों से पुरुष सूक्त बेजोड़ माना जाता है। दुर्भाग्य की बात तो यह है कि आमतौर से अनेक लोग इसके अनुपम होने का सही कारण नहीं जानते।

  1. मनु अध्याय 1, श्लोक-31

  2. मनु अध्याय 10, श्लोक-4

  3. मनु अध्याय 2, श्लोक-6