अध्याय 1. शूद्रों की गूढ़ समस्या - Page 34

शूद्रों की गूढ़ समस्या

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  1. ऋग्वेद 33.13 ii. ः हे मारूत, मैं पिता मनु द्वारा चयन किए गए आपके

शुद्ध फलदायी निदान, जो अत्यंत शुभ हैं, लाभकारी हैं, उनकी तथा रुद्र के

आशीर्वाद और पराक्रम की कामना करता हूं। ख्1,

  1. ऋग्वेद VIII. 52.1ः प्राचीन मित्र (रुद्र) बलशाली देवताओं की शक्ति से

संपन्न रहा है। पिता मनु ने उसके लिए देवों तक पहुंचने के माध्यम स्वरूप

स्रोत तैयार किए हैं। ख्2,

  1. ऋग्वेद III. 3.6ः अग्नि देवताओं एवं मनुष्य की संतान अर्थात सभी जीव-जंतुओं

के साथ बहुविध यज्ञ कर रहे हैं। ख्3,

  1. ऋग्वेद IV. 37.1ः हे देवगण वाजस और निभुक्षण जिस मार्ग से देवता भ्रमण

करते हैं उसी आकाश मार्ग से हमारे यज्ञ में उपस्थित हों, ताकि शुभ मुहुर्त में

मनुष्यों में यज्ञ हो सके। ख्4,

  1. ऋग्वेद VI. 14.2ः मानुष यज्ञ में अग्नि की स्तुति कर रहे हैं। ख्5,

उपरोक्त पाठ से यह निस्संदेह सिद्ध होता है कि ऋग्वेद के मंत्रों के सृष्टा ऋषियों ने मनु को भारतीय आर्यों का जनक बताया है। मनु को भारतीय आर्यों का जनक का यह सिद्धांत इतना रूढ़ हो चुका था कि ब्राह्मण ग्रंथों और पुराणों तक ने इसकी पुनरावृत्ति करना आवश्यक समझा। ऐतरेय ब्राह्मण ख्6, विष्णु पुराण ख्7, और मत्स्य पुराण ख्8, में भी इसको प्रतिपादित किया गया है। यह सत्य है कि उन्होंने ब्रह्मा को मनु का जनक माना है, किन्तु मनु के पिता होने के ऋग्वेद में उल्लिखित सिद्धांत को स्वीकार कर स्थायित्व दे रखा है। ख्9, ‘‘पुरुष सूक्त’’ में मनु का उल्लेख क्यों नहीं है? यह विचित्र बात है। क्योंकि

  1. म्यूर खंड 1, पृष्ठ 163

  2. म्यूर खंड 1, पृष्ठ 163

  3. म्यूर खंड 1, पृष्ठ 165

  4. म्यूर खंड 1, पृष्ठ 165

  5. म्यूर खंड 1, पृष्ठ 165

  6. म्यूर द्वारा उद्धत खंड 1, पृ. 108

  7. वही पृष्ठ 105-107

  8. वही पृष्ठ 110-112

  9. विस्तार में जाने पर पता चलता है कि बहुत भ्रांति है। विष्णु पुराण के अनुसार ब्रह्मा ने स्वयं को नर

और नारी दो भागों में बांटा। नारी शतरूप में कहलाई। शतरूपा ने निरंतर चेष्टा से प्रतिरूप में स्वयंभू मनु

को प्राप्त कर लिया। विष्णु पुराण में ब्रह्मा द्वारा अपनी पुत्री से सहवास करने का प्रसंग नहीं मिलता

हैं परंतु ऐतरेय ब्राह्मण और मत्स्य पुराण के अनुसार ब्रह्मा द्वारा अपनी पुत्री शतरूपा के साथ संभोग

किए जाने से मनु उत्पन्न हुआ। मत्स्य पुराण यह भी कहता है कि मनु ने तप करके अनंता नामक पत्नी

को प्राप्त किया। रामायण (मयूर खंड 1.117) के अनुसार मनु पुरुष नहीं स्त्री है और दक्ष प्रजापति की

पुत्री है जो बाद में कश्यप की पत्नी बनीं।