अध्याय 3. शूद्रों की स्थिति के बारे में ब्राह्मणवादी सिद्धांत - Page 49

34 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाड्ख्.,मय

II

एक

(क) आपस्तम्ब धर्म सूत्र में कहा हैःµ

ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र चार वर्ण हैं। ख्1, इनमें क्रमशः हर वर्ण अपने बाद वाले वर्ण से जन्म से ही श्रेष्ठ है। ख्2, इनमें शूद्र और जिन्होंने पतित कार्य किए हैं उनको छोड़कर सभी को (1) उपनयन (जनेऊ धारण करना), (2) वेदाध्ययन तथा (3) यज्ञ का अधिकार है।

(ख) वशिष्ठ धर्म सूत्र में जो कहा गया है, वह इस प्रकार हैः- ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र चार वर्ण हैं। इनमें ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य द्विज कहे जाते हैं। इनका प्रथम जन्म मां के पेट से होता है। दूसरा यज्ञोपवीत संस्कार से। दूसरे जन्म में सावित्री मां होती है और गुरू पिता।

गुरू वेद का ज्ञान देने के कारण पिता माना गया है। ख्3, चारों वर्ण संस्कार और मूल वर्ण में जन्म के कारण भिन्न हैं।

वेद की ऋचाओं में भी यह कहा गया है - ब्राह्मण उसके मुख से, क्षत्रिय बाहु से, वैश्य उसकी जंघाओं से और उसके पैरों से शूद्र उत्पन्न हुए। वेदों में यह भी कहा गया है कि शूद्र को यज्ञोपवीत का अधिकार नहीं है। उसने ब्राह्मण को गयात्री छंद से, क्षत्रिय को त्रिष्टुभ से, उत्पन्न किया है। ख्4,

(ग) मनुस्मृति में इस विषय पर निम्न विधान प्रस्तुत किया गया हैः- नियंता ने विश्व की समृद्धि हेतु मुख, बाहु, जंघा और चरणों से क्रमशः ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र को उत्पन्न किया। ख्5, ब्राह्मण, क्षत्रिय, और वैश्य द्विज कहलाते हैं जबकि चौथा वर्ण शूद्र का एक ही बार जन्म होता है। ख्6,

दो

(क) आपस्तम्ब धर्म सूत्र का कथन हैःµ

वर्णत्रयी (द्विज) शमशान या उसके निकट वेदपाठ न करें।

यदि शमशान पर गांव बस गया हो तो उस स्थान को खेती करने के योग्य बना दिया गया हो तब वहां वेद पाठ निषद्ध नहीं। किन्तु यदि वह स्थान अब भी शमशान के नाम से ही प्रचलित हो तो वहां वेद पाठ निषद्ध है।

  1. प्रश्न 1, पटल -1, खंड 1, सूत्र 4-5

  2. प्रश्न 1, पटल -1, खंड 1, सूत्र 6

  3. अध्याय 2, मंत्र 1-4

  4. अध्याय चार श्लोक 3

  5. अध्याय चार श्लोक 31

  6. अध्याय दस श्लोक 4