शूद्रों की स्थिति के बारे में ब्राह्मणवादी सिद्धांत
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शूद्र तथा जाति से बहिष्कृत शमशान भूमि के समान हैं और सूत्र संख्या 6 इन पर लागू होता है। कुछ लोगों का कहना है कि जिस मकान में शूद्र और बहिष्कृत रहते हैं वहां विद्या अध्ययन नहीं करना चाहिए। यदि विद्यार्थी और शूद्र स्त्री एक दूसरे को देख लें तब वेद के मंत्रोच्चारण में बाधा उत्पन्न करनी चाहिए। ख्1,
अपवित्रावस्था में ब्राह्मण या अन्य उच्च वर्ण वाला व्यक्ति यदि किसी खाद्य पदार्थ को स्पर्श कर दें तो वह अपवित्र तो हो जाता है, अखाद्य नहीं होता।
किंतु यदि अपवित्र शूद्र द्वारा लाया गया हो भोजन खाने योग्य नहीं होता। शूद्र यदि भोजन करते समय स्पर्श कर दे तो भोजन करने वाले को भोजन छोड़ देना चाहिए। ख्2,
(ख) विष्णु स्मृति का विधान है - द्विज की लाश कोई शूद्र न ले जाए भले ही वह मृतक का कोई संबंधी ही क्यों न हो। शूद्र की लाश को कोई द्विज न ले जाए। माता और पिता के शव को उनका वह पुत्र ले जाए जो अपने माता-पिता की जाति का ही हो। शूद्र किसी द्विज के शव को कदापि न ले जाए, चाहे वह मृतक उसका पिता ही क्यों न हो। ख्3,
(ग) वशिष्ट धर्म सूत्र में कहा गया हैµ
अब हम खाद्य और अखाद्य की व्याख्या करते हैंःµ
चिकित्सक, शिकारी, व्यभिचारिणी स्त्री, गदाधारी, चोर, अभिशप्त, नपुंसक द्वारा दिया गया भोजन अथवा जाति से बहिष्कृत कर दिए का भोजन नहीं खाना चाहिए। न ही किसी कंजूश, श्राद्ध कर्म करने वाले, कैदी, रोगी, सोमलता के विक्रेता, बढ़ई, धोबी, शराब बेचने वाले, गुप्तचर, सूदखोर अथवा चर्मकार का और न ही किसी शूद्र का दिया हुआ भोजन करना चाहिए। ख्4, कुछ लोग श्ूद्रों की नस्ल को शमशान भूमि की संज्ञा देते हैं। अतः शूद्रों की उपस्थिति में वेद पाठ नहीं करना चाहिए। वे यम द्वारा उदघोषित निम्नांकित मंत्र का उल्लेख करते हैंः-
‘‘दुष्ट शूद्र जाति स्पष्ट रूप से शमशान भूमि की भांति है, अतः इनके समक्ष वेद पाठ नहीं किया जाना चाहिए।’’ ख्5,
कुछ व्यक्ति पवित्र वेदाध्ययन से और कुछ आत्म संयम से श्रद्धापात्र हो जाते हैं, किंतु जिस ब्राह्मण में शूद्र का दिया भोजन नहीं किया हो वह आदर का सर्वोत्तम पात्र होता है। ख्6, यदि शूद्र द्वारा दिया गया भोजन ब्राह्मण के आमाशय में हो और वह मृत्युगामी
प्रश्न 1, पटल -3, खंड 9, सूत्र 6-11
प्रश्न 1, पटल -5, खंड 16, सूत्र 21-22
अध्याय 19, मंत्र 1-4
अध्याय 14, मंत्र 1-4
अध्याय 18, मंत्र 11-15
अध्याय 6, श्लोक 26