अध्याय 3. शूद्रों की स्थिति के बारे में ब्राह्मणवादी सिद्धांत - Page 53

38 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाड्ख्.,मय

(ग) बृहस्पति के धर्म सूत्र के अनुसारःµ

ब्राह्मण द्वारा क्षत्रिय को अपशब्द कहने पर पचास पण, वैश्य को अपशब्द कहने पर पच्चीस पण और शूद्र को अपशब्द कहने पर साढ़े बारह पण दंड देना होगा। यह दंड केवल गुणवान या धार्मिक शूद्र को अपशब्द कहने पर अर्थात जो अपना शूद्रत्व स्वीकार कर स्वेच्छा से सेवारत है और निरपराध है। इसके विपरीत ब्राह्मण किसी किसी अधर्मी शूद्र को अपशब्द कहने पर किसी दंड का विधान नहीं है।

वैश्य यदि क्षत्रिय को अपशब्द कहे तो वह सौ पण दंड देगा। किंतु क्षत्रिय वैश्य को अपशब्द कहे तो उसका आधा दंड देगा। क्षत्रिय यदि शूद्र को अपशब्द कहे तो केवल बीस पण दंड देगा। किंतु वैश्य शूद्र को अपशब्द कहे तो उसका दुगुना दंड देगा। इसके विपरीत शूद्र वैश्य को अपशब्द कहे प्रथम उल्लिखित दंड देगा। क्षत्रिय को गाली देने पर बीच का दंड और ब्राह्मण को अपशब्द कहने पर कठोरतम दंड का भागी होगा। ख्1,

(घ) मनुस्मृति के अनुसारः-

क्षत्रिय ब्राह्मण को कटुवचन कहे तो एक सौपण दंड, वैश्य ब्राह्मण को अपशब्द कहे तो वह एक सौ पचास पण या दो सौ किन्तु शूद्र को प्राण दंड देना होगा। इसके विपरीत यदि ब्राह्मण क्षत्रिय का अपमान करे तो पचास पण, वैश्य का अपमान करें तो पच्चीस पण किंतु शूद्र का अपमान करने पर केवल साढ़े बारह पण दंड देना होगा। ख्2,

क्षत्रिय की हत्या करने पर ब्राह्मण हत्या के दंड का चौथा भाग प्रायश्चित, अपने कर्तव्य में संलग्न वैश्य की हत्या करने पर आठवां भाग प्रायश्चित और शूद्र की हत्या करने पर सोलहवां भाग प्रायश्चित करेगा। यदि भूल से ब्राह्मण से क्षत्रिय की हत्या हो जाए तो एक बैल और एक हजार गायें ब्राह्मण को दान करे अथवा तीन वर्ष तक गांव के बाहर वृक्ष के नीचे रह कर जटा बढ़ाकर प्रायश्चित करे। अपनी वृत्ति में संलग्न वैश्य की अनजाने में हत्या करने पर ब्राह्मण एक वर्ष तक प्रायश्चित करे और एक सौ एक गायें ब्राह्मणों को दान करें, किन्तु शूद्र का अनजाने में वध हो जाने पर 6 मास तक प्रायश्चित करे अथवा एक बैक और दस सफेद गायें पुरोहित को दान करें। ख्3,

(ड.) विष्णु स्मृति के अनुसारःµ

शरीर के जिस अंग से निम्न वर्ण का मनुष्य अपने से उच्च वर्ण वाले का अपमान करे, या आघात करे, राजा उसके उस अंग को कटवा दे। यदि अपने से उच्च वर्ण वाले मनुष्य के आसन पर बैठ जाए तो राजा उसके चूतड़ को दाग कर उसे देश से निकाल दे। यदि वह थूक दे तो उसके दोनों होंठ कटवा दें। यदि अपान वायु विसर्जित (पाद) कर दे तो उसका पिछला हिस्सा काट दे। यदि गाली दे तो उसकी जिव्हा काट दे। इसी

  1. अध्याय 20, मंत्र 7-11

  2. अध्याय 8, मंत्र 267-268

  3. अध्याय 11, मंत्र 127-131