अध्याय 3. शूद्रों की स्थिति के बारे में ब्राह्मणवादी सिद्धांत - Page 54

शूद्रों की स्थिति के बारे में ब्राह्मणवादी सिद्धांत

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प्रकार यदि निम्न वर्ण में उत्पन्न पुरुष अपने से उच्च वर्ण को गर्वोक्ति के कर्तव्य पालन संबंधी कुछ सलाह दें तो राजा उसके मुंह पर गरम तेल डलवा दे। यदि शूद्र उच्च वर्ण वाले को अपमान से नाम लेकर पुकारे तो उसकी जीभ में दस अंगुल की कील आग से लाल करके गाड़ दे। ख्1,

पांच

(क) वृहस्पति स्मृति के अनुसारःµ

‘‘यदि शूद्र धर्मोपदेश दे, वेदोच्चारण करे या ब्राह्मण का अपमान करे तो उसकी जीभ काट दी जाए।’’ ख्2,

(ख) गौतम धर्म सूत्र के अनुसारः-

‘‘अब यदि वह जान बूझकर वेद पाठ का श्रवण करे तो उसके कान में पिघला हुआ सीसा या लाख डलवा दे। यदि वेद पाठ करे तो उसकी जीभ कटवा दी जाए, यदि वह वेद मंत्र का स्मरण करे तो उसके टुकड़े कर दिए जाएं।’’ ख्3,

(ग) मनुस्मृति के अनुसारःµ

‘‘वेतन लेकर पढ़ाने वाला या वेतन देकर पढ़ने वाला शूद्र, शूद्र से पढ़ने वाला या शूद्र को पढ़ाने वाला, देव और पित्रों दोनों के अनुष्ठान में त्याज्य है।’’ ख्4,

शूद्र को सलाह न दे, उच्छिष्ट और हवि शेषांश न दे। उसे धर्म और व्रत का प्रत्यक्ष उपदेश भी न दे। जो धर्म का उपदेश और व्रत का आदेश करता है वह शूद्र के साथ असंवृत नामक अंधकारमय नरक में गिरता है। ख्5,

शूद्र के सम्मुख वेद पाठ न करे। रात के पिछले प्रहर में वेद पढ़कर थके हुए ब्राह्मण को सोना नहीं चाहिए। ख्6,

छः

मनुस्मृति का उपदेश हैःµ

‘‘ब्राह्मण शूद्र का धन बेरोक-टोक ले सकता है, क्योंकि शूद्र का अपना धन कुछ नहीं है, समस्त धन उसके स्वामी का है। ख्7,

  1. अध्याय 5, सूत्र 19-25

  2. अध्याय 12, मंत्र 12

  3. अध्याय 20, सूत्र 4-6

  4. अध्याय 3, मंत्र 156

  5. अध्याय 4, मंत्र 78-81

  6. अध्याय 4, मंत्र 99

  7. अध्याय 8, मंत्र 417