शूद्रों की स्थिति के बारे में ब्राह्मणवादी सिद्धांत
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मताधिकार और प्रशासनिक पद प्राप्ति का अधिकार, राजनैतिक अधिकार कानून की दृष्टि में सम्मानित होने पर निर्भर करता था। रोमन नागरिक का पूत या एक्जिस्टमैशियों दोनों प्रकार के हो सकते थे। दूसरी ओर रोम का निवासी नागरिकता के अधिकारों से वंचित होते ही राजनैतिक अधिकारों से वंचित हो सकता था। राजनैतिक अधिकारों की प्राप्ति के लिए कानून की दृष्टि में सम्मानित व्यक्ति होना आवश्यक होता था। केवल नागरिकता प्राप्त व्यक्ति राजनैतिक अधिकार नहीं प्राप्त कर सकता था।
दो स्थितियों में राजनैतिक अधिकार समाप्त हो सकते थे। स्वाधीनता खत्म होने पर या अपराधी सिद्ध होने के बाद दंड भुगतने पर। स्वाधीनता की समाप्ति पर राजनैतिक अधिकार पूर्णतः समाप्त हो जाते थे। अपराध की गंभीरता ख्1, के अनुसार राजनैतिक अधिकार में अंतर पड़ता था। जब अपराध गंभीर होता था तब राजनैतिक अधिकार की समाप्ति को ‘‘इनफैमिया’’ कहते थे। साधारण अपराध ‘‘टुरापटुडो’’ कहा जाता था। गंभीर अपराध पर राजनैतिक अधिकार छीन लिए जाते थे। रोमन विधान में प्रतिवादी को गंभीर अपराधी की श्रेणी में रखा जाता था। चोरी, डकैती, फरेब आदि को गंभीर अपराध माना जाता था। इन अपराधों के मुख्य अभियुक्त के साथी को भी समान दंड दिया जाता था। जनता के बीच मंच पर आकर अभिनय करना या तलवारबाजी के करतब दिखाना, कलंकित होने के कारण सेना से निकाल दिया जाना, वेश्यावृत्ति करना तथा अन्य निम्न स्तर के कार्य जिससे समाज में निंदा हो आदि, गंभीर अपराध समझे जाते थे।
इनफैमिया का परिणाम राजनैतिक अधिकारों की समाप्ति, चुनाव में वोट देने के अधिकारा पर प्रतिबंध तथा प्रशासनिक पद से निष्कासन की व्यवस्था होती थी। ख्2,
रोम के संविधान में अधिकारों और निषेधों का सूक्ष्म विश्लेषण करने से स्पष्ट होता है कि ये सब के लिए समान थे। इनमें जातिगत-भेदभाव, अधिकार और निषेध रोम के संविधान में सामान्य रूप से संचालित किए जाते थे। नागरिक और राजनैतिक अधिकारों का उपयोग कोई भी कर सकता था और इन अधिकारों की समाप्ति पर सभी को एक समान प्रतिबंध भुगतने पड़ते थे। ब्राह्मणवादी विधान का चरित्र कैसा है?
- जैसे चोरी, डकैती, फरेब, जालसाजी, कलाकार के रूप में मंच पर आना, सेना से निकाला जाना,
वैश्यावृत्ति करना, अन्य निर्दलीय या अनैतिक कृत्य करना।
- इन्फैमिया के दूसरे परिणाम भी होते थे जैसे कि अटार्नी पद से वंचित होना, मुख्तार न्यायालय में
मुख्तारनामा भरने या गवाही देने की हैसियत समाप्त होना। इन्फैमियों दो प्रकार से प्रभावी होता था,
भर्तसना से या अदालत के फैसले से। सेंसरों को यह अधिकार था कि वे लोक नैतिकता का पालन
कराएं, सिनेटरों को विशेष अधिकार से वंचित करें, सामंतों को घुड़सवारी से वंचित कर दें, यहां तक
कि राजनीतिक अधिकार संपन्न व्यक्ति को भी निर्वस्त्र कर दें। वे बिना विशेष जांच के लोकमत के
अनुरूप अपना दायित्व निभाते थे। उनके नोटिस को केवल अदालतों में ही चुनौती दी जा सकती थी।
उनकी मुक्ति केवल जन विशेष अधिकार अथवा सम्राट के हाथों ही हो सकती थी।