अध्याय 4. शूद्र बनाम आर्य - Page 70

शूद्र बनाम आर्य

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सवाल में यही प्रचलित हो गए हैं। इससे अनभिज्ञ रहने पर स्थिति स्पष्ट नहीं होती। यदि हम इनका प्रचलित नाम न देंगे तो यह त्रुटि होगी। मध्य शिरस्क का समानांतर शब्द दरम्याना है। कपाल की चौड़ाई माथे की तीन चौथाई से चार बटा पांच होनी चाहिए। दीर्घ शिरस्क का अर्थ है लंबी खोपड़ी कपाल की चौड़ाई-लंबाई का चार बटा पांच होना चाहिए।

चेहरे की स्थिति सिर के अनुपात में मुखाकृति से संबद्ध होती है। आमतौर पर यह पाया जाता है कि अपेक्षाकृत बड़ी खोपड़ी वाले की मुखाकृति गोल होती है जिसमेंं गाल की हड्डी ठोड़ी से माथे की ऊंचाई के अनुरूप होती है। माप लेने में एक रूपता न होने के कारण सही तुलना नहीं हो पाती है। फिर भी यह नियम निरापद है, अर्थात लंबी खोपड़ी अंडाकार चेहरा, छोटी खोपड़ी तो गोल चेहरा। नृविज्ञान के इन मापदंडों को अपनाते हुए प्रजातियों के संबंध में उत्कृष्ट विद्धान इस निष्कर्ष पर पहुंच हैं कि यूरोप के लोग खोपड़ी और मुखाकृति की दृष्टि से तीन भागों में बांटे जा सकते हैं जो अलग से तालिका में दिए गए हैं। ख्1,

तालिका

यूरोपीय प्रजाति

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क्या कोई आर्य प्रजाति शारीरिक दृष्टि से इस श्रेणी में आती है। इस विषय में दो मत हैं। एक मत आर्य जाति के अस्तित्व के संबंध में है। ख्2,

इसके अनुसारः-

‘‘आर्य जाति की खोपड़ी अपेक्षाकृत लंबी है। उसकी सीधी नाक है, चेहरा लम्बोतरा है। चेहरे की हड्डियां उठी हैं। लंबाई पर्याप्त है। सामान्यतः सुगठित बलिष्ठ शरीर है।’’

  1. रिप्ले रेसेज आफ यूरोप पृष्ठ 121

  2. वही - खंड - एक पृष्ठ 121