60 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाड्ख्.,मय
1. ध्रुवीय लक्षण
सूर्य दक्षिण से निकलता है।
तारों का उदय और अस्त नहीं होता, बल्कि वे गोलाकार चक्कर लगाते रहते हैं। वे
दिगंत का चक्कर 24 घंटों में पूरा करते हैं। पूरे वर्ष उत्तरी गोलार्ध और आकाश ही
दृष्टिगत होता है और दक्षिणी गोलार्ध तथा आकाश लुप्त रहता है।
- एक वर्ष में एकदीर्घ दिवस और दीर्घ रात्रि ही होती है। दोनों रात और दिन छः-छः
महीने के होते हैं।
- वहां मात्र एक सुबह और एक ही शाम होती है अर्थात सूर्य का वर्ष भर में एक
ही उदय व अस्त होता है। किंतु प्रभात का प्रकाश अथवा संध्या का धुंधला प्रकाश
लगातार दो महीने रहता है। परंतु हमारें यहां की भांति प्रभात तथा संध्या का झिटपुट
अंतरिक्ष के एक ही भाग तक सीमित नहीं है, बल्कि वह अंतरिक्ष में वृतवत चलायमान
रहता है, जैसे कि कुम्हार का चाक और 24 घंटे में एक चक्कर पूरा करता है।
सवेरे प्रकाश के ये चक्कर जारी रहते हैं जब तक कि सौर गोला अंतरिक्ष के ऊपर
न आ जाए। फिर सूर्य छः महीने इसी दशा में रहता है। वह अस्त हुए बिना घूमता
है और 24 घंटे में एक चक्कर पूरा करता है।
2. परिध्रुवीय लक्षण
- सूर्य सदा परमबिंदु के दक्षिण में रहेगा परंतु देखने वाला शीतोष्ण कटिबंध से भी
देखे तो इसके विशेष लक्षण नजर नहीं जाएंगे।
- अनेक तारागण परिध्रुवीय हैं। परिभ्रमण के अधिकांश समय वे क्षितिज के ऊपर रहते
हैं। इसलिए सदा दिखाई पड़ते हैं। शेष तारागण का शीतोष्ण कटिबंध में उदय अस्त
होता रहता है। परंतु वे वक्र गति में घूमते हैं।
- वर्ष के तीन भाग होते हैं। (1) एक अनवरत दीर्घ रात्रि जो मकर संक्रांति में आरंभ
होती है और अक्षांश के अनुसार 24 घंटे से अधिक और छः मास से कम समय
तक रहती है। (2) इतना ही अनवरत और दीर्घ दिन जो उष्ण कटिबंध में होता है।
(3) इसके बाद शेष वर्ष में सामान्य दिन और रात आरंभ होते हैं। एक रात्री या
एक दिवस 24 घंटे से अधिक नहीं होते। लंबी अनवरत रात के बाद निकलने वाला
दिन पहले तो छोटा होता और लंबी अवधि का होने तक लगातार बढ़ता रहता है।
लंबा दिन समाप्त हो जाने पर रात भी छोटी होती है और वर्ष के अंत तक लंबी
अनवरत रात्रि बन जाती है।
- लंबी अनवरत रात्रि के पश्चात का प्रभात कई दिन का होता है परंतु उत्तरी ध्रुव पर
स्थान की अक्षांश रेखा के अनुसार आनुपातिक रूप से छोटा होता हैं उत्तरी ध्रुव के
कुछ अंश इधर-उधर परिक्रमित प्रभात का अधिकांश अवधि में ऊषा कालीन प्रकाश