अध्याय 4. शूद्र बनाम आर्य - Page 85

70 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाड्ख्.,मय

की पुण्य वृत्ति और पाप वृत्ति का उल्लेख किया है। प्रत्येक के विषय में कहा गया है न मनसा, न वाचा और न बौद्धिक विश्वास, न कथन, न कार्य चेतना और न ही आत्मा से हम सहमत होते हैं।

इसका उल्लेख गाथा स्पेंता मैन्यू-यासना हा 48 पद 4 में है, वरेनेग का अर्थ है धर्म, आस्था। इस पद में जरायुष्ट्र कहते हैं, जो अपने मन को निर्मल और पवित्र बना लेता है और भावों को कार्य व्यवहारों से शुद्ध रखता है उस व्यक्ति की कामनाएं अपनी आस्था के अनुरूप होती हैं।

इसका उल्लेख गाथा स्पेंता मैन्यू यासना हा 49 पद 3 पर है। वरणेयी को संप्रदान कारक में प्रयुक्त किया गया है जिसका अर्थ धर्म है। इसी पद में ‘थेसई’ शब्द आया है इसका अर्थ भी धर्म संप्रदाय और धर्म संहिता है। ये दोनों शब्द एक ही पद में हैं और हमारे तर्क की पुष्टि करते हैं। जैया कि थेसा जिसका अर्थ धर्म है, अहुरकेसा का अर्थ भी धर्म है। थेसा का पहलवी अनुवाद किया है जिसका तात्पर्य धर्म है।

वेंदीदाद अवेस्ता भाषा में जरस्थु धर्म ग्रंथ में ‘‘अन्यो वरण’’ आता है। यहां ‘‘अन्यो’’ का अर्थ है अन्य, ‘‘वरण’’ का अर्थ है धर्म। इस प्रकार ‘‘अन्योवरण’’ शब्द का अर्थ है अन्य धर्म की अनुयायी। वेंदीदाद में भी एक शब्द है अन्यो थेसा इसका अर्थ भी अन्य धर्मानुयायी है।

गाथा से उत्पन्न क्रिया के कई रूप देखने को मिलते हैं जैसे अहनुवेति गाथा यासना हा 31 पद 31 जरस्थु कहते है या ज्यांतो विसपेंग वायुराया शब्द का अर्थ है मैं सभी प्राणियों का खुदा में अकीदा (विश्वास) पैदा करता हूं। यासना हा 28 पद 5 में एक शब्द आता है बोरोइमेदी ‘हम यकीन लाएं’। हमें गाथा बहिश्त तैश्त्रिस्त यासना हा 53 पद 9 में एक शब्द मिलता है दुज वरेणेइस। यह रोचक बहुवचन है।, उपसर्ग दुज का अर्थ है अधर्म या दुष्टमापूर्ण धर्म का अनुयायी।

जरस्थु धर्म में यासना हा 12 में सत्य की स्वीकारोक्ति में एक शब्द आता है ‘‘फ्रावरण’’ इसका अर्थ है मैं भाजदायासनो जरस्थुरिस्त (माजदा) इबादत अथवा जरस्थु धर्म में स्वीकारोक्ति। यासना 12 में ‘या वरण’ हैं। यहां ‘‘या’’ संबंध कारक है जिसका अर्थ है आस्था, धर्म 1 ‘या वरण’ यासना 12 में नौ बार आया है और इसका स्पष्ट अर्थ धर्म और आस्था है। फिर ‘वरण’ शब्द का कैशा के साथ प्रयोग धर्म का अर्थ देता है।

यासन 16 में जरस्थु शब्द है ‘वरणमचा क्षेमचा याजमेदे’ इससे जरस्थु की पूजी का रोचक उल्लेख है। इस शब्दावली से स्पष्ट आभास मिलता है कि इसका अर्थ जरस्थु धर्म और उसमें आस्था है। उपरोक्त का अनुवाद है हम जरस्थु आस्था और धर्म की उपासना करते हैं।