अध्याय 5. आर्यों के विरुद्ध कार्य - Page 95

80 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाड्ख्.,मय

प्राप्त की। उन्होंने घोर तप किया और सृष्टि का आरंभ कर दिया।

महाभारत के आदि पर्व में सृजन कथा एकदम ही भिन्न है ख्1, ःµ

वैशम्पायन ने कहाः -‘‘मैं स्वयं प्रजापति द्वारा देवताओं और अन्य जीव पदार्थों के सृजन और विनाश की कथा सुनाता हूंःµ

ब्रह्मा के मरीचि, अत्रि, अंगिरस, पुलरत्य, पुलह और कृत 6 पुत्र हुए। मरीचि के पुत्र कश्यप से सभी जीव पैदा हुए। दक्ष प्रजापति की अदिति दिति, दनु कला, दनयु, सिमुक, क्रोध, प्रथा, विश्वा, विनता, कपिला, पुनी और कुद्र तेरह श्रेष्ठ कन्याएं थी।। इनके असंख्य यौद्धा पुत्र और शक्तिशाली पौत्र हुए।

‘‘ब्रह्मा के सीधे हाथ के अंगूठे से महर्षि दक्ष और बांए अंगूठे से उनकी पत्नी पैदा हुई। महर्षि की पत्नी से 50 कन्या रत्न प्राप्त हुए। महर्षि दक्ष ने इनमें से दस धर्म को, सत्ताईस इंद्र (सोम) को और दैवी परंपरा के अनुसार तेरह कश्यप को दे दीं।

पितामह प्रजापति के उत्तराधिकारी मनु उनका पुत्र था। (यह स्पष्ट नहीं है कि वह किस के पुत्र थे)। मनु के पुत्र आठ बसु थे। ब्रह्मा के दक्षिण वक्ष के धर्म ने जन्म लिया। तेजस्वी धर्म के तीन पुत्र हुए। साम, काम और हर्ष (शांत, प्रेम, आनंद), जो सभी प्रणालियों के प्रिय थे, वे अपनी शक्ति से विश्व को ऊर्जा देते हैं, भृगु पुत्र च्यवन की पत्नी मनु की पुत्री आरूशि थी। ब्रह्मा के दो अन्य पुत्र धातृ और विधातृ मनु के साथी थे। कमलवासिनी परम सुंदरी लक्ष्मी उनकी बहन थी। उनके मस्तिष्क से जन्म लेने वाले पुत्र अश्व थे जो आकाश में विचरते थे। भूख में जीवों द्वारा एक दूसरे को आहार बना देने के कारण अधर्म का जन्म हुआ। निरूति उनकी पत्नी थी। निरूति के नाम पर ही राक्षस नैरूत कहलाए। निरूति उनकी पत्नी थी। निरूति ने तीन दुष्कर्मी पुत्रों भय, महाभय और मृत्यु को जन्म दिया। मृत्यु के पत्नी या पुत्र नहीं थे क्योंकि वह स्वयं ही सब का अंत करने वाले थे।’’

‘‘प्राचेतस के दस ऋषि पुत्रों को जन्म दिया। जिनके मुख से निकली अग्नि से सभी महान पुरूष जल गए। उनसे दक्ष प्रचेतस का जन्म हुआ और दक्ष से समस्त जीवों का। एक सहस्र पुत्र प्राप्त हुए। देवर्षि नारद ने उनकी मुक्ति कर सांख्य का उपदेश दिया। संतति के इच्छुक दक्ष प्रजापति ने पचास कन्याओं को जन्म दिया। इनमें से दस धर्म को, तेरह कश्यप को और 27 इंद्र (सोम) को मिली। मरीचि पुत्र कश्यप ने अपनी तेरह पत्नियों में दक्षयानी से इंद्र, आदित्य और विवस्वत को उत्पन्न किया। विवस्वत के पुत्र यम वैवस्वत हुए मार्तण्ड (सूर्य विवस्वत) से अत्यंत विद्वान मनु और यम पैदा हुए। मनु से मानव जाति का आरंभ हुआ। ब्राह्मण और क्षत्रिय पैदा हुए। ब्राह्मण वेद वेदागों के ज्ञाता हुए। मनु के दस पुत्र येण, घृष्णु, नारीश्यांत, नाभाग, इक्ष्याकु, कृश, सारयाति, इला,

  1. म्यूर खंड 1, पृष्ठ 122-126