अध्याय 5. आर्यों के विरुद्ध कार्य - Page 96

आर्यों के विरूद्ध कार्य

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पोरिशद्र और नाभागारिष्ट हुए। तथा अन्य मनुष्य पैदा हुए। मनु के पचास पुत्र और भी थे जो सदैव आपस में लड़ते झगड़ते रहते थे। बाद में इला के पुत्र पुरूरवा हुए। कहा जाता है कि इला इनकी माता और पिता दोनों ही थीं।’’

VII

रामायण के द्वितीय कांड ख्1, में सृष्टि रचना का वर्णन इस प्रकार किया गया हैः-

‘‘वशिष्ठ ने राम को बताया - ‘‘विश्व के विनाश और पुनर्रचना के मूल को जाबाली भी जानती हैं, तदापि हे भूपति विश्वोत्पत्ति के संबंध में आप मुझ से सुनें। प्रारंभ में सर्वत्र जल ही जल थ। जल से पृथ्वी बनी। तदुपरांत आराध्यों के साथ स्वयंभू ब्रह्मा उत्पन्न हुए, वे बाराह शूकर बन गए। उन्होंने पृथ्वी को ऊपर उठाया और अपने सात पुत्रों के साथ विश्व रचना की। ब्रह्मा ने मरीचि और मरीचि से कश्यप का जन्म हुआ। कश्यप के पुत्र विवस्वत से मनु का जन्म हुआ। मनु के पुत्र इक्ष्वाकु हुए। इक्ष्वाकु हुए। इक्ष्वाकु अयोध्या के पहले राजा थे’’।

विश्वोत्पति की एक अन्य कथा तीसरे कांड ख्2, में है जो इस प्रकार हैः-

‘‘राम के शब्द सुनकर जटायु ने अपनी जाति और समस्त जीव पदार्थों की उत्पत्ति बताई - ‘‘सुनों, मैं प्रजापतियों के आविर्भाव का वृतांत सुनाता हूं, जिनका जन्म सर्वप्रथम हुआ। कर्दम प्रथम प्रजापति थे। उनके बाद निकृत, शेष समसराय तेजस्वी बाहुपुत्र, स्थाणु मरीचि, अत्रि, कृति, पुलस्त्य, अंगिरस, प्रचेतस, पुलह, दक्ष, विवस्वत और अरिष्टनेमि हुए और अंतिम प्रजापति यशस्वी कश्यप हुए। प्रजापति की साठ पुत्रियां थी। कश्यप अदिति, दिति, दनु, कलक, ताम्र, क्रोधवासा, मनु और अनला नामक आठ कन्याओं से विवाह किया और त्रिभुवन की वृद्धि के लिए अपने समान यशस्वी पुत्रों के जन्म की याचना की।

अदिति, दिति, दनु और कलक के अतिरिक्त सबने असहमति प्रकट की, अदिति से तेंतीस देवता, आदित्य, बसु, रूद्र, और दो अश्विनी कुमार पैदा हुए। कश्यप की पत्नी मनु ने अपने मुख से ब्राह्मणों, वक्ष से क्षत्रियों और जंघाओं से वैश्यों तथा पैरों से शूद्रों को जन्म दिया। ऐसा वेद में बताया गया हैं अजला से समस्त वनस्पति और फल पैदा हुए।

VIII

उदाहरण के रूप में अब पुराणों को देखते हैं कि उनमें क्या बताया गया है। विष्णु पुराण ख्3, में लिखा हैःµ

‘‘आदि में विश्वनियता हिरण्यगर्भ ब्रह्मा थे जो विष्णु भी थे, ऋक, यजुस, सामस और अथर्ववेद के समान थे। ब्रह्मा के दाएं अंगूठे से प्रजापति दक्ष का जन्म हुआ। दक्ष की

  1. म्यूर खंड 1, पृष्ठ 115

  2. म्यूर खंड 1, पृष्ठ 116

  3. म्यूर खंड 1, पृष्ठ 220-221