82 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाड्ख्.,मय
एक पुत्री थी अदिति। अदिति ने विवस्वत को जन्म दिया। विवस्वत से मनु हुए। मनु को इक्ष्वाकु, नृग, धृष्ट, सर्याति, नरिश्यांत, प्रमशु, नाभगणेदिष्ट, कृष्ट और पृशाध्र हुए।’’
पुत्रोत्पत्ति की कामना से मनु ने मित्र और वरूण के निमित्त यज्ञ किया। किंतु यज्ञ पुरोहित की त्रुटि से इला नामक कन्या उत्पन्न हुई। मित्र और वरूण की कृपा से इला मनु के पुत्र सुघुम्न के रूप में आ गई। कालांतर में वह ईश्वर (महादेव) के कोप से फिर स्त्री बनी और सोम (चन्द्रमा) पुत्र बुध के आश्रम के निकट चक्कर काटने लगी। बुध उस पर आसक्त हुआ। और उसके साथ सहवास कर पुरूरवा को जन्म दिया। ऋषियों के अनुरोध पर यज्ञ देवता ने इला को फिर से सुधम्न बना दिया।-
विष्णु पुराण में मनु के पुत्रों का विवरण निम्न प्रकार हैःµ
(अ) गुरू की गाय के वध के कारण पृशध्र शूद्र हो गए।
(ब) कृश से क्षत्रिय पैदा हुए।
(स) नेदिष्ट के पुत्र नाभाग वैश्य हुए।’’
यह सूर्यवंश की कहानी है। विष्णु पुराण ख्1, में अन्य समानांतर कथा भी है जिसके अनुसार चन्द्रवंश का उदय अत्रि से बताया जाता है। जैसे कि मनु से सूर्यवंश आरंभ हुआ।
‘‘अति ब्रह्मा के पुत्र और सोम (चन्द्रमा) के पिता थे। ब्रह्मा ने सोम (चंद्रमा) को वनस्पति, ब्राह्मण और तारागण का साम्राज्य दिया। राजसूय यज्ञ के उपरांत सोम ने गर्वान्वित हो देव पुरोहित बृहस्पति की पत्नी तारा का हरण कर दिया। ब्रह्मा, ऋषिगण और देवताओं के समझाने पर भी उसे लौटाने को सहमत न हुए। उषाण ने सोम का पक्ष लिया और अंगिरा के शिष्य रूद्र ने बृहस्पति का। देवों ने एक पक्ष और दैत्यों ने दूसरे पक्ष को सहायता की और दोनों पक्षों में भीषण युद्ध हुआ। ब्रह्मा ने मध्यस्था की और तारा को बृहस्पति के पास लौटाने के लिए सोम को बाध्य किया। तारा लौटाई गई लेकिन तब तक गर्भ धारण कर चुकी थी। उसने बुध को जन्म दिया। पूछाताछ करने पर उसने सोम को बुध का पिता स्वीकार किया। मनु पुत्री इला को इसी बुध से पुरूरवा ख्2, नामक पुत्र की प्राप्ति हुई। पुरूरवा ख्3, के 6 पुत्र हुए जिनमें आयुस ज्येष्ठ थे। आयुस के पांच पुत्र नहुष, क्षात्रबुद्ध, रंभा, राजी और अनेनस हुए। क्षात्रबुद्ध के एक पुत्र सुनाहोत्र हुए। सुनाहोत्र के कासलेस और गृतसगद तीन पुत्र हुए। गृतसमद का सौनक पुत्र हुआ जिसने चार वर्ण की वर्ण व्यवस्था का आरंभ किया। कासलेस के काशीराज पुत्र हुए और उनके पुत्र दीर्घन्तमा तथा दीर्घत्तमा के पुत्र धन्वन्तरि हुए।’’
म्यूर खंड 1, पृष्ठ 225-226
पुरूरवा और अपसरा उर्वशी की प्रेमकथा शतपथ ब्राह्मण (11.5.1.11.) विष्णु पुराण (6.6.19.11),
भागवत पुराण (9-14), हरिवंश पुराण (खंड 26) और महाभारत खंड 75 में पुरूरवा का ब्राह्मणों से
संघर्ष हुआ। इसका उल्लेख आगे है।
- विष्णु पुराण 6-71