अध्याय 5. आर्यों के विरुद्ध कार्य - Page 98

आर्यों के विरूद्ध कार्य

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विश्वोत्पत्ति की इन कथाओं की तुलना इस पुस्तक के द्वितीय अध्याय में चर्चित विवरण से निम्नांकित दो मत स्पष्ट होते हैं।

(1) एक वृतांत सांसारिक है और दूसरा नैसर्गिंग।

(2) एक कहता है कि मनु मनुष्य थे और उनसे सभी प्राणी पैदा हुए, और दूसरा

ब्रह्मा या प्रजापति द्वारा सृष्टि की रचना मानते है।

(3) एक ऐतिहासिक सत्य है और दूसरा दैविक।

(4) एक में प्रलय का वर्णन है दूसरा इस विषय में मौन है।

(5) एक का लक्ष्य चातुर्वर्ण्य का वर्णन है तो दूसरे का लक्ष्य समाज के आदि

उदगम की व्याख्या है।

ये मौलिक भिन्नताएं हैं विशेष रूप से चातुर्वर्ण्य के संबंध में। सांसारिक मत चातुर्वर्ण्य को देवी मान्यता है जब कि नैसर्गिक मत इसके प्रतिकूल है। यह सत्य है कि रामायण और पुराणों में दो अलग विचार धाराओं को मिलकर यह सिद्ध करने का प्रयास किया गया है कि मनु से ही चातुर्वर्ण्य व्यवस्था का जन्म हुआ लेकिन यह प्रयास जान बूझकर और पूर्व प्रतिपादित मत का अनुसरण है। इन दोनों मतों में ऐसी बुनियादी भिन्नता है कि इस चेष्टा के बाद भी दोनों मतों में भिन्नता स्पष्ट है। हमारे सामने के दो सिद्धांत स्थापित होते हैं।

पहला यह कि यह पुराणों द्वारा प्रचारित दैविक व्यवस्था है और दूसरा यह कि यह नैसर्गिक और मनु के पुत्रों में विकसित हुआ। इनका परिणाम इतना विचित्र है कि दोनों सिद्धांतों में मौलिक मतभेद हैं। खेद है कि शोधकर्ताओं का ब्राह्मण साहित्य में वर्णित इन दो परस्पर विरोधी सिद्धांतों पर ध्यान नहीं गया। फिर भी इनके अस्तित्व और यथार्थ की अवहेलना नहीं की जा सकती। इन दो विरोधी मतों की भिन्नता का अर्थ है दो भिन्न आर्य जन श्रेणियां। एक चातुर्वर्ण्य को मानती थी और दूसरी इस व्यवस्था से सहमत नहीं थी। बाद में दोनों मिल कर एक हो गई।

IX

मेरे नृवंशशास्त्र संबंधी विचार पर तीसरा और अकाटय तर्क सर हरबर्ट रिस्ले द्वारा भारतवासियों का वर्ष 1901 में किया गया सर्वेक्षण है। इसके अनुसार शीर्षाभिसूचक तालिका से निष्कर्ष निकलता है कि भारतवासी (1) आर्य, (2) द्रविड़, (3) मंगोल और (4) सीथियन नामक चार विधि जातियों के मिश्रण हैं। उन्होंने इनके मूल स्थान का भी सविस्तार विवरण दिया गया है उनका सर्वेक्षण सामान्य है। डा. गुहा ने उनके इस मत की मीमांसा सन् 1936 में की। इस सर्वेक्षण का भारतीय नृविज्ञान में महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने (डा. गुहा) जो मानचित्र ख्1, तैयार किया है उससे भारतीय लोगों के शिरोमाप मामले में अच्छा खासा प्रकाश पड़ता है। डा. गुहा के अनुसार भारतीय लंबे