अध्याय 5. आर्यों के विरुद्ध कार्य - Page 99

84 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाड्ख्.,मय

सिर वाली और छोटे सिर वाली दो जातियों के मिश्रण हैं। लंबे सिर वाली जाति देश के मध्यवर्ती भाग तथा छोटे सिर वाली सीमावर्ती क्षेत्रों की निवासी थीं। इस मत की पुष्टि भारत के विभिन्न भागों में प्राप्त मानव खोपडि़यों से होती है। डाक्टर गुहा कहते हैंः- ‘‘उपरोक्त क्षेत्र के प्रागैतिहासिक अवशेष वैसे तो अति अल्प हैं किन्तु सिंधु घाटी को छोड़कर तत्कालीन भारतीय -प्रजाति-इतिहास की रूपरेखा दृष्टिगोचर होती है। ईसा से चार करोड़ वर्ष पहले भारत के उत्तर पश्चिम में लंबे सिर और पतली नाक वाली जाति का प्रभुत्व था। इसके साथ ही लंबे चेहरे तथा चपटी नाक वाली एक अन्य बलिष्ठ मानव जाति के अस्तित्व का भी पता चलता है। हालांकि दोनों की नासिकाओं में कम ही अंतर था।’’

‘‘हड़प्पा में मिली मानव खोपडि़यों से एक तीसरी श्रेणी चौड़े सिर के मानव के अस्तित्व का पता चलता है।’’

संक्षेप में भारतीय प्रजाति लम्बोत्तरे सिर वाली अथवा भूमध्यसागर के क्षेत्र की ओर छोटे सिर वाली अथवा ‘‘अल्पाइन’’ क्षेत्र की है।

भूमध्यसागर क्षेत्र की जाति के विषय में कहा जाता है कि यह भारत में यूरोप से आयी जो आर्य भाषा बोलती थी। यह माना जाता है कि ये भूमध्यसागर के क्षेत्र से भारत आए। इसके स्थान निर्धारण से यह स्पष्ट हो जाता है कि यह निश्चय ही अल्पाइन जाति के पश्चात भारत में आयी होगी।

इसी प्रकार अल्पाइन जाति के संबंध में साक्ष्य जुटाने पड़ेंगे। पहला प्रश्न यह है कि अल्पाइन जाति का मूल निवास कहां था और दूसरा यह कि वह कौन सी भाषा बोलते थे। प्रो. रिप्ले ख्2, के अनुसार यह स्थान एश्यि में हिमालय के आसपास ही कहीं था। उनका तर्क उन्हीं के शब्दों में इस प्रकार हैःµ

‘‘यह कहने का हमें क्या अधिकार है कि पूर्व से होने वाला यह आव्रजन है -कोई विजय नहीं है। क्या हर बात से यह संकेत नहीं मिलता कि यह एक क्रमिक शांति पूर्ण आव्रजन था? प्रायः निर्जन क्षेत्रों में बस जाने के कारण क्या यह संकेत करता है कि आव्रजन एशिया की दिशा से हुआ? इसका प्रमाण महाद्वीप के निवासियों की जानकारी पर निर्भर करता है, विशेष रूप से पश्चिम हिमालय के पामीर पठार क लोगों की जानकारी पर। यह संसार की छत कहलाता है। मैक्समूलर और आरंभिक विद्वानों ने जहां इसे आर्य सभ्यता का आरंभिक शैशव स्थल बताया है जहां ऐसा मानव रहता था जो ठीक उस जाति से मिलता-जुलता है जो अल्पाइन और सेल्टिक में रहती थी। डी. उजफाल्वी, टोपीनार्ड और अन्य अनुसंधान करता उनके आसपास के विचित्र क्षेत्रों

  1. परिशिष्ट 5 देखें।

  2. रेसेस आफ यूरोप, पृ. 473-474