क्या हिंदू गोमांस कभी नहीं खाते थे?
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एक ही उदाहरण पर्याप्त होगा। तैत्तरीय ब्राह्मण में जिन काम्यष्ठि यज्ञों का वर्णन है उनमें न केवल गो और बैल की बलि देने की आज्ञा है किन्तु यह भी स्पष्ट किया गया है कि किस प्रकार के गो और बैल की किस देवता को बलि चढ़ानी चाहिए। विष्णु को नदिया बैल की बलि चढ़ाई जाए, वृत्र संहारक इन्द्र को बलि देना हो तो कृश बैल चुनना चाहिए कि जिसके सींग लटकते हों और जिसके माथे पर टीका हो। पूर्शण के लिए काली गो, रुद्र के लिए लाल गो, और इसी प्रकार तैत्तरीय ब्राह्मण पंयशारदीय सेवा नामक यज्ञ का वर्णन करता है, जिसकी सबसे अधिक महत्त्व की बात यह थी कि उसमें पांच वर्ष की आयु के सत्रह बिना गोखे बाल और नदिया बैल और उतने ही तीन वर्ष की आयु के नदिया बछड़े मारे जाते थे।
और आपस्तम्ब धर्मसूत्र के विरुद्ध निम्नलिखित बातें ध्यान देने योग्य हैंः-
पहले तो उसी सूत्र में 15, 14, 29 श्लोकों में जिसके विरुद्ध कथन मिलता है, लिखा हैµ गाय और बैल पवित्र हैं। इसलिए खाद्य हैं।
दूसरी बात गृह सूत्र में मधुपर्क बनाने की विधि दी गई है। आर्यों में विशेष अतिथियों के स्वागत की एक खास प्रथा थी। जो सर्वश्रेष्ठ चीज परोसी जाती थी उसे मधुपर्क कहते थे। कई गृह सूत्रों में मधुपर्क के बारे में विस्तृत सूचनाएं हैं। गृह्य सूत्रों के अनुसार 6 जनों को अधिकार है कि उन्हें मधुपर्क दिया जाए
- ऋत्विज अर्थात यज्ञ करने वाला ब्राह्मण, 2. आचार्य, 3. वर, 4. राजा,
- स्नातक, अर्थात गुरुकुल की शिक्षा सम्पन्न विद्यार्थी तथा 6. ऐसा कोई भी व्यक्ति जो अतिथेय का रूप हो। कोई-कोई इस सूची में अतिथि को भी सम्मिलित करते हैं। ऋत्विज, राजा और आचार्य का उनके आगमन पर मधुपर्क हर बार देना होता था।
यह मधुपर्क किस चीज का बनता था? जिन चीजों से यह मधुपर्क बनता था उनके बारे में मतभेद है। आश्वलायन गृहसूत्र और आपस्तम्ब गृहसूत्र शहद और दही खिलाने की बात कहते हैं (13-10)। पाराशर गृहसूत्र (13) के समान दूसरे सूत्र ग्रंथों के अनुसार मधुपर्क दही, शहद तथा मक्खन तीन चीजों के मिश्रण से बनना चाहिए। आपस्तम्ब गृह सूत्र (13, 11, 12) ने दूसरों के इस मत का भी उल्लेख किया है कि ये तीनों चीजें मिलाई जा सकती हैं। अथवा इन तीनों के साथ भुना हुआ जौं और बाजरा पांच चीजें भी मिलाई जा सकती हैं।
हिरण्य गृह सूत्र (1, 12, 10, 12) दही, शहद, घी, पानी और अन्न इन पांच चीजों में से किन्हीं तीन को मिलाने की छूट देता है। कौशिक सूत्र में 9 प्रकार की चीजों को मिलाने का उल्लेख है। ब्रह्मा (शहद और दही), इन्द्र (दूध और खीर), सौम्य (दही और घी), पूशान (घी तथा मथा हुआ दही), सारस्वत (दूध और घी),