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क्या हिंदू गोमांस कभी नहीं खाते थे?

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  1. यदि प्रतित्रहरण एक ही हो तो उसी के दो टुकड़े कर दिये जाएं।

  2. पेट पर पत्री नामक बर्तन।

  3. वह कटोरी जिसमें याज्ञिक भोजन सामग्री का हिस्सा रखा जाता है।

  4. गुप्तांगों पर शमी नाम की लकड़ी।

  5. जांघों पर दो जलती हुई लकडि़यां।

  6. टांगों पर चूना और पत्थर।

  7. पांवों पर दो टोकरियां।

  8. यदि एक ही टोकरी हो तो उसी के दो हिस्से कर दें।

  9. जो खोखली चीजें हैं उनमें घृत छिड़ककर उन्हें भरा जाता है।

  10. मृत व्यक्ति के पुत्र को चक्की के नीचे और ऊपर का पाट उठाना

चाहिए।

  1. तांबे, लोहे तथा मिट्टी के सामान।

  2. मादा पशु के पेट की ओझड़ी निकाल कर ऋग्वेद का यह मंत्र कि फ्उस

बाजू पर जो तेरी आग से रक्षा करेगा और जो गो से प्राप्त होता हैय् पढ़ते

हुए उसके द्वारा मृत व्यक्ति का सिर और मुख ढांप देना चाहिए। (ऋग्वेद

10.16.7)

  1. पशु के गुरदे निकाल कर मृत व्यक्ति के हाथों में रख दें। साथ में यह

मंत्र पढ़ेंµ शमी के दोनों पुत्र दोनों कुत्तों से बचें। दाहिने हाथ में दाहिना

अंड भाग बाएं हाथ में बायां। (ऋग्वेद 10.14.10)

  1. मृत व्यक्ति के दिल पर वह पशुओं का दिल रखे।

  2. कुछ आचार्यों के मतानुसार आटे या चावल के दो पिंड भी।

  3. कुछ आचार्यों के मतानुसार यह तभी जब गुरदे प्राप्त न हों।

  4. पशु के अंग-अंग का बंटवारा करके और उसको मृत व्यक्ति के उन्हीं

अंगों पर रख कर और उसे उसकी खाल से ढक कर वह यह मंत्र पढ़ता

हैः- फ्हे अग्नि। जब प्रणीता जल आगे ले जाया गया है तो इस कटोरी

को मत उलट।य् (ऋग्वेद 10.16.8)

  1. उसका बायां घुटना मोड़ कर उसे दक्षिण अग्नि में फ्अग्नेय स्वाहा,

कमाया स्वाहा, लोकाय स्वाहा, अनुमतये स्वाहा, कह कर आहुति डालनी

चाहिए।य्