11. क्या हिन्दू गोमांस कभी नहीं खाते थे? - Page 114

क्या हिंदू गोमांस कभी नहीं खाते थे?

कार्य से उनके आंसू ढुलक रहे थे।य्

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दूसरी ओर कुरदंत बुद्ध धम्म और संघ की शरण में जाने का सौभाग्य प्राप्त करने हेतु बुद्ध के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट करते हुए इस प्रकार के यज्ञों में जो भयानक पशुबलि दी जाती है उसका कुछ वर्णन करता हैःµ

फ्मैं बौद्ध धर्म की शरण में आता हूं। भंते आज से यावज्जीवन मुझे त्रिशरण-प्राप्त उपासक जानें। हे गौतम मैं स्वयं स्वेच्छा से सात सौ वृषभ, सात सौ तरुण बैल, सात सौ बछड़े, सात सौ अजा और सात सौ भेड़ों को मुक्त करता हूं। वे चरागाहों में विचरें, शीतल जल और बयार से आनंदित हों।य्

संयुक्त निकाय में कौशल नरेश प्रसेन्नजित द्वारा किए गए एक यज्ञ का वर्णन है। लिखा है कि पांच सौ वृषभ और पांच सौ बछड़े और बहुत से तरुण बैल, अजा और भेड़ यज्ञ में बलि देने के लिए यूपस्तंभ तक ले जाए गए।

ऐसे साक्ष्य रहने पर किसी को भी उस बारे में संदेह नहीं हो सकता कि एक समय था जब हिन्दू चाहे ब्राह्मण हो चाहे अब्राह्मण् हो, न केवल मांसाहारी थे अपितु गोमांस भक्षक भी थे।