भाग पांच - नए सिद्धांत और कुछ प्रश्न - Page 115

इस बारे में तो किसी भी प्रकार का संदेह नहीं किया जा सकता है कि आदिम जातियों, जरामय-पेशा जातियों और अस्पृश्य वर्गों की जो दशा है, वह हिंदू सभ्यता के मूल सिद्धान्तों का ही कुफल है।

µ डॉ. भीमराव अम्बेडकर