102 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाड्ख्.,मय
है जिसे सुलझाने की आवश्यकता है। अब्राह्मणों ने गोमांस खाना क्यों छोड़ दिया। इसे जानने के लिए इस विधान का अध्ययन आवश्यक है। तत्संबंधी विधान या तो अशोक के निर्देशों में होगा या मनु के विधान में।
II
हम अशोक से ही आरंभ करते हैं। अशोक के वे शिलालेख जिनका इस विषय से संबंध है तीन हैं। शिलालेख संख्या-1, स्तंभलेख संख्या-2 और 5. शिलालेख संख्या-1 इस प्रकार हैःµ
फ्यह धर्म लेख देव प्रिय प्रियदर्शी राजा ने लिखवाया है। यहां इस राज्य में राजधानी में किसी जीव को मार कर होम न किया जाए और आनन्दोत्सव न मनाया जाए, क्योंकि देवानाम प्रियदर्शी राजा में बहुत दोष देखते हैं। तथापि एक प्रकार के ऐसे उत्सव हैं जिन्हें देवानाम प्रियदर्शी राजा पसंद करते हैं। पहले राजा की पाकशाला में प्रतिदिन कई शत सहस्त्र जीव सूप (शोरबा) बनाने के लिए मारे जाते थे, पर अब से जबकि यह धर्म लेख लिखा जा रहा है केवल तीन ही जीव मारे जाते हैं (अर्थात) दो मोर और एक मृग। पर मृग का मारा जाना नियम नहीं। ये तीनों प्राणी भी भविष्य में नहीं मारे जाएंगे।य्
स्तंभ लेख संख्या-2 इस प्रकार हैःµ
फ्देवानाम प्रिय प्रियदर्शी राजा ऐसा कहते हैंµधर्म (करना) अच्छा है। पर धर्म क्या है? चित्त क्लेश की न्यूनता, बहुत से शुभ कार्य, दया, दान, सत्य और शौच (पवित्रता) का पालन करना। ज्ञान-दान भी मैंने बहुत प्रकार से किया। दो पायों, चौपायों तथा जलचरों के प्रति मैंने बहुत अनुग्रह किया। मैंने उन्हें प्राण दान दिया तथा और भी अनेक प्रकार के उपकार किए। यह लेख मैंने इसलिए लिखवाया कि लोग इसके अनुसार आचरण करें और यह चिरस्थायी रहे। जो इसके अनुसार चलेगा वह सुकृत करेगा।य्
स्तंभ लेख संख्या-5 इस प्रकार हैःµ
फ्देवताओं के प्रिय प्रियदर्शी राजा कहते हैंःµ राज्याभिषेक के 26 वर्ष बाद मैंने इन प्राणियों का वध करना बंद करा दिया है, यथा सुग्गा, मैना, अरुण, चकोर, हंस, नान्दीमुख, गोलाट, जतुका (चमगादड़) कछुआ, साही, गिलहरी, बारासिंगा, वृषभ, बंदर, ओकपिंड, मृग, श्वेल फाख्ता और सब तरह के वे चौपाए जो न तो किसी प्रकार उपभोग में आते हैं और न खाए जाते हैं। बकरी, भेड़ और सुअरों, गायों तथा इनके बच्चों को जो छह महीने तक के हों, मारा जाए। मुर्गों को बधिया न किया जाए। जीवित प्राणियों के साथ भूसी को न जलाया जाए। अनर्थ करने के लिए या प्राणियों