12. गैर-ब्राह्मणों ने गोमांस खाना क्यों छोड़ा? - Page 119

104 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाड्ख्.,मय

को न खाएं।

5.18. पंचनखियों में सेह, साही, शल्यक, गोह, गेंडा, कछुआ और खरहा तथा

एक ओर दांत वाले पशुओं में ऊंट को छोड़ कर बकरे आदि पशु भक्ष्य

हैं ऐसा कहा गया है।

IV

पशुओं की हत्या के बारे में अशोक और मनु के जो विधान हैं वे यहां आ गए हैं। लेकिन हमारा विषय मुख्य रूप से गो-हत्या है। अशोक के निर्देशों का विवेचन करने पर प्रश्न उठता है कि क्या गो-हत्या निषिद्ध ठहराई गई थी? इस बारे में मतभेद प्रतीत होता है। श्री विसेंट स्मिथ का विचार है कि अशोक ने गोवध का निषेध नहीं किया था। अशोक के निर्देशों पर टिप्पणी करते हुए प्रोफेसर स्मिथ कहते हैं ख्1, ः-

फ्यह बात ध्यान देने की है कि अशोक के निर्देशों में गो-हत्या का निषेध नहीं है। जो ऐसा लगता है कि यह गो-हत्या वैध रही थी।य्

प्रोफेसर राधाकुमुद मुकर्जी, प्रोफेसर स्मिथ से सहमत नहीं हैं। उनका कहना है ख्2, कि अशोक ने गो-हत्या अवश्य बंद कर दी थी। प्रो. मुकर्जी का आधार शिलालेख 5 का हत्या वर्जन वह उद्धरण है जो सभी चौपायों पर लागू था। उनका तर्क है कि यह विचार कि गो की हत्या की छूट मिल गई थी। स्तम्भ लेख में जो कुछ कहा गया है उसका यह ठीक अर्थ नहीं है। शिला लेख में जो कथन है वह विशेषता लिए हुए है। वह सभी चौपायों पर लागू नहीं होता। यह केवल उन चौपायों पर लागू होता है जो न तो किसी प्रकार उपयोग में आते हैं न खाए जाते हैं। गो को हम ऐसा चौपाया नहीं कह सकते जो न तो किसी प्रकार काम में आता हो और न खाया ही जाता हो। ऐसा लगता है कि प्रोफेसर स्मिथ का यह कथन ठीक है कि अशोक ने गो वध बंद नहीं किया था। प्रो. मुकर्जी यह कह कर जान छुड़ाना चाहते हैं कि अशोक के समय गो मांस नहीं खाया जाता था इसलिए उसकी निषेधात्मक आज्ञा गो पर भी लागू होती है। उनका कथन एकदम अनर्गल है। क्योंकि गो ऐसा पशु है जिसे सभी वर्ग के लोग खाते ही थे।

प्रो. मुकर्जी की तरह अशोक के शिलालेख के साथ खींचातानी करके यह अर्थ निकालने की कोई आवश्यकता नहीं कि उसने गो-हत्या कानून से बंद कर दी थी मानो ऐसा करना उसका विशेष कर्तव्य था। अशोक का गो से किसी तरह का कोई

  1. स्मिथ, अशोक, पृ. 35

  2. मुकर्जी, अशोक, पृ. 181, 184