108 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाड्ख्.,मय
पहले पशु को इस यज्ञ स्तंभ से ही बांधते हैं। यूप की आवश्यकता बताने के अनन्तर ऐतरेय ब्राह्मण में इसका तात्पर्य दिया हैःµ
फ्यूप एक शस्त्र है। इसके सिर के आठ छोर होने चाहिएं। क्योंकि एक शस्त्र (लोहे के वल्लभ) के आठ कोने होते हैं। जब भी वह उससे किसी शत्रु या विरोधी पर प्रहार करता है तो उसे मार डालता है। यह शस्त्र जिसे अभिभूत करना हो उसे अभिभूत कर देता है। यूप एक शस्त्र है जो पशु विनाश के लिए सीधा खड़ा रहता है। इससे यज्ञकर्ता का शत्रु जो (यज्ञ में) उपस्थित हो सकता है उस यूप को देख कर संकट ग्रस्त हो जाता है।य्
यूप के लिए लकड़ी यज्ञकर्ता के यज्ञ करने के उद्देश्य के अनुसार भिन्न-भिन्न प्रकार की चुनी जाती है। ऐतरेय ब्राह्मण का कथन हैःµ
फ्जो स्वर्ग चाहता है उसे अपनी यूप खादिर की लकड़ी से बनानी चाहिए क्योंकि देवताओं ने खादिर की लकड़ी के यूप से ही दिव्य लोक को जीता। उसी प्रकार यज्ञकर्ता खादिर की लकड़ी से बने हुए यूप से दिव्यलोक को जीतता है।य्
फ्जो भोजन चाहता है और स्थूलता चाहता है उसे अपना यूप बेल (बिल्व) की लकड़ी से बनाना चाहिए। बेल के पेड़ पर प्रतिवर्ष फल लगते हैं। यह उर्वरता का प्रतीक है क्योंकि यह जड़ से शाखाओं तक (प्रतिवर्ष) आकार में बढ़ता रहता है। इसलिए यह मोटापे का प्रतीक है। जो यह जानता है और इसलिए अपना यूप बेल की लकड़ी का बनाता है उसके बच्चे और पशु मोटे होते हैं।य्
फ्बेल की लकड़ी से बने यूप के बारे में इतना और कहना है जो बिल्व को बार-बार प्रकाश कहता है और ऐसा जानता है वह अपने स्वयं में प्रकाश बन जाता है और स्वयं में सबसे श्रेष्ठ।य्
फ्जो सौंदर्य और पवित्र विद्या चाहता है उसे अपना यूप पलाश की लकड़ी का बनाना चाहिए क्योंकि ढाक सौंदर्य और पवित्र विद्या का वृक्ष है। जो यह जानता है और इसलिए अपना यूप पलाश की लकड़ी का बनाता है वह सुंदर हो जाता है और पवित्र विद्या प्राप्त करता है।य्
पलाश की लकड़ी से बने यूप के बारे में इतना और कहा गया है कि पलाश सब वृक्षों का गर्भ है। इसीलिए वे उस पलाश के वृक्ष की बात करते हैं। जो यह जानता है उसकी सभी इच्छाएं चाहे किसी पेड़ से भी क्यों न हों, पूरी होती है।
उसके बाद यूप के अभिषेक का संस्कार होता है। ख्1,
- ऐतरेय ब्राह्मण (मार्टिन हग)- II, पृष्ठ 74-78