13. ब्राह्मण शाकाहारी क्यों बने? - Page 125

110 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाड्ख्.,मय

फ्जब पशु के चहु ओर अग्नि लेकर घूमा जाता है तो उसे अपने देवता और अपने छन्द के द्वारा यशस्वी बनाता है। वह एक घोड़े की तरह ले जाया जाता है का अर्थ है कि वह उसे घुमाते हैं मानो वह कोई घोड़ा हो, एक रथी की तरह अग्नि तीन बार यज्ञ के पास से गुजरती है का अर्थ है कि वह एक रथी की तरह (शीघ्रता) से यज्ञ के चारों ओर वह वाजपति (भोजन अधिष्ठाता) कहलाता है, क्योंकि वह तरह-तरह के भोजनों का अधिष्ठाता है।य्

फ्अध्वर्यु कहता हैः हे होता! देवताओं को आहुति देने के लिए अतिरिक्त आज्ञा दो।’’

तब होतृ (बधिकों को) आदेश देता हैµ फ्हे दिव्य बधिकों। (अपना कार्य) आरंभ करो और जो मानवीय बधिक हो वह भी। इसका अर्थ है कि वह सभी बधिकों को चाहे वे देवताओं में हों चाहे मानवों में आज्ञा देता है कि (आरंभ करो)।य्

फ्वध करने के शस्त्र यहां लाओ, तुम लोग जो यज्ञ के दोनों स्वामियों की ओर से यज्ञ का आदेश दे रहे हो।य्

पशु आहुति है, यज्ञकर्ता आहुति का स्वामी है। इस प्रकार होतृ यज्ञ कर्ता को उसकी अपनी आहुति से यशस्वी बनाता है। इसलिए वे सत्य कहते हैंµजिस देवता के लिए भी पशु का वध किया जाता है वही उसका स्वामी है। यदि एक ही देवता के लिए पशु की बलि दी जाती है तो पुरोहित को कहना चाहिए मेधपतये अर्थात! यज्ञ के स्वामी के लिए (एक वचन), यदि देवताओं के लिए तो उसे द्विवचन का प्रयोग करना चाहिए यज्ञ के दोनों स्वामियों के लिए। यदि अनेक देवताओं के लिए है तो उसे बहुवचन का प्रयोग करना चाहिए यज्ञ के स्वामियों के लिए। यही निश्चित धर्म है।य्

तुम उसके लिए अग्नि लाओ। जब पशु को वध स्थान की ओर ले जाया गया, तो उसने अपने सामने मृत्यु को देखा। वह देवताओं के पास नहीं जाना चाहता था, तब देवताओं ने उससे कहाµआओ हम तुम्हें स्वर्ग पहुंचाएंगे। पशु मान गया और बोला ः तुम में से एक को मेरे आगे-आगे चलना चाहिए। देवताओं ने स्वीकार किया। तब अग्नि पशु के आगे-आगे चला और पशु उसके पीछे-पीछे। इसी से वे कहते हैं कि हर पशु पर अग्नि का अधिकार है, क्योंकि पशु अग्नि के पीछे-पीछे चला। इसीलिए वे पशु के आगे-आगे अग्नि ले जाते हैं।य्

‘‘पवित्र दूब बिखेर दो। पशु वनस्पति पर ही जीता है। होता इस प्रकार पशु को उसकी समस्त आत्मा देता है। (क्योंकि वनस्पति उसका भाग समझी जाती है)।य्

पशु को चारों ओर आग घुमाने के बाद यज्ञ के लिए पुरोहित को दिया जाता है। यज्ञ के लिए पशु का समर्पण कौन करे? इस विषय में ऐतरेय ब्राह्मण ख्1, की आज्ञा