118 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाड्ख्.,मय
- गो-ब्रज (गोशाला) में प्रविष्ट होने पर स्नातक को चाहिए कि अपना दायां
हाथ नंगा कर ले। ख्1,
- यदि कोई गो अपने बछड़े को दूध पिला रही हो तो उसमें बाधा डालना
अथवा किसी को उसकी सूचना देना स्नातक के लिए निषिद्ध है। ख्2,
गो पर चढ़ना स्नातक के लिए निषिद्ध है। ख्3,
गो की हिंसा करना अर्थात् उसे दुख देना स्नातक के लिए निषिद्ध है। ख्4,
जूठे मुंह गो को स्पर्श करना स्नातक के लिए निषिद्ध है। ख्5,
इन उल्लेखों से सिद्ध होता है कि मनु गो को पवित्र पशु नहीं मानते थे। दूसरी ओर वह उसे अपवित्र पशु मानते थे जिसके स्पर्श से संस्कार-जन्य अपवित्रता होती थी।
मनुस्मृति में ऐसे श्लोक हैं जिनसे सिद्ध होता है कि मनु ने गोमांस भक्षण का निषेध नहीं किया था। इस संबंध में तीसरे अध्याय के तीसरे श्लोक का उल्लेख किया जा सकता है। यह इस प्रकार हैःµ
फ्अपने धर्म से प्रसिद्ध, पिता ब्रह्मदाए को प्राप्त किए हुए, माला पहने हुए तथा श्रेष्ठ आसन पर बैठे ब्रह्मचारी की पूजा पिता या आचार्य गोदुग्ध के मधुपर्क से करे।य्
प्रश्न उठता है कि मनु एक स्नातक को गो देने की सिफारिश क्यों करते हैं? स्पष्ट ही है जिससे वह मधुपर्क बना सके। यदि ऐसा हो तो इसका यही अर्थ है कि मनु को यह बात ज्ञात थी कि ब्राह्मण गो-मांस का भक्षण करते हैं और यह उसे मना नहीं करते थे।
दूसरा उल्लेख उस चर्चा का है जो मनु ने पशुओं के खाद्य और अखाद्य मांस के बारे में की है। अध्याय 5 के मंत्र 18 में मनु का कथन हैःµ
पंचनखियों में सेह, साही, गोह, गैंडा, कछुआ, खरहा तथा एक ओर दांत वाले पशुओं में ऊंट को छोड़कर बकरे आदि पशु भक्ष्य हैंµ ऐसा कहा है।
इस श्लोक में मनु ने ऐसे घरेलू पशुओं, जिनके एक ही जबड़े में दांत होते हैं, उनमें ऊंट ही नहीं गो के मांस खाने की भी अनुमति देता है किंतु यह बात ध्यान
मनु. 4. 58
मनु. 4. 59
मनु. 4. 70
मनु. 4. 162
मनु. 4. 142