124 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाड्ख्.,मय
है जो कि गुप्त राज वंश के स्कंद गुप्त के राज्यकाल का है। यह एक दान पात्र है जिसके अंतिम श्लोक में लिखा हैः फ्जो भी इस प्रदत्तदान में हस्तक्षेप करेगा वह गो हत्या, गुरु हत्या अथवा ब्राह्मण हत्या के पाप का भागी होगा। स्कंद गुप्त के पितामह चन्द्रगुप्त द्वितीय का भी एक लेख है जो गो हत्या को ब्रह्म हत्या के ही समान पाप मानता है। इसमें 93 गुप्त संवत्सर दिया गया है यह 412 ई. के बराबर होता है। मध्यप्रांत के सांची के प्रसिद्ध बौद्ध स्तूप के पश्चिम में खड़ा हुआ है, उसमें चन्द्रगुप्त के एक अधिकारी के दान का भी वर्णन है। इसका अंत इस प्रकार होता है। जो भी इस व्यवस्था को विकृत करेगा उसे गो हत्या, ब्राह्मण हत्या अथवा पंच अनान्तर्य का पाप लगेगा। इस कथन का उद्देश्य है विकृति करने वाला चाहे ब्राह्मण धर्म का अनुयायी हो, चाहे बौद्ध धर्म का, दोनों को भयभीत करना। पांच अनान्तर्य बौद्धों के पांच महापातक हैं। वे हैं मातृ हत्या, पितृ हत्या, अर्ह्त हत्या, बुद्ध के शरीर का रक्त बहाना, भिक्षु संघ में मतभेद पैदा करना। जिन महापातकों का ब्राह्मण धर्मी को भय दिलाया जाता है वे केवल दो हैंµ गो की हत्या और ब्राह्मण की हत्या। ब्राह्मण की हत्या तो स्पष्ट ही है कि महापातक है क्योंकि जितनी भी स्मृतियां हैं सभी में ब्राह्मण हत्या को महापातक कहा गया है, किंतु गो हत्या को आपस्तम्ब, मनु, याज्ञवल्क्य और दूसरों ने केवल उपपातक ही माना है। किंतु यहां इसे ब्रह्म हत्या के साथ जोड़ देने से और दोनों को बौद्धों के अनान्तर्यों के साथ समानता का दर्जा दे दिए जाने से यह स्पष्ट है कि पांचवीं शताब्दी के आरंभ में गो हत्या को महापातकों की श्रेणी में सम्मिलित किया गया। इस प्रकार गो हत्या कम से कम एक शती पहले महापातक गिनी जाने लगी होगी अर्थात् चौथी शताब्दी के आरंभ में।य्
प्रश्न उठता है कि एक हिंदू नरेश को क्या पड़ी थी कि वह गोवध के विरुद्ध अर्थात् मनु के नियमों के विरुद्ध नियम बनाता? उत्तर यही है कि ब्राह्मणों के लिए यह अनिवार्य हो गया था कि बौद्ध भिक्षुओं पर अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करने के लिए वे वैदिक धर्म के अपने एक अंश से पिंड छुड़ा लें। यदि हमारा यह विश्लेषण ठीक है तो यह स्पष्ट है कि गो पूजा बौद्ध और ब्राह्मण धर्म के संघर्ष का परिणाम है। यह एक साधन था, जिसका ब्राह्मणों ने अपनी खोई हुई स्थिति को पुनः प्राप्त करने के लिए उपयोग किया।