14. गोमांस भक्षण से छितरे बहिष्कृत व्यक्ति अछूत कैसे बने? - Page 142

गोमांस भक्षण से छितरे व्यक्ति अछूत कैसे बने?

शब्द में कहें तो कोई भी चीज पवित्र मानी जा सकती है।

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पवित्र सनक कह सकते हैं। प्रो. दुरखीम को ही यदि हम फिर उद्धृत करें तो-

फ्पवित्र चीजें वे हैं जिनकी निषेधों द्वारा रक्षा होती है और जिन्हें निषेध पृथक करते हैं और लौकिक चीजें वे हैं जिन पर ये निषेध लागू होते हैं और जिन्हें पहली चीजों से दूर-दूर रहना ही चाहिए।य्

धार्मिक निषेध अनेक रूप धारण कर लेते हैं। इनमें सबसे महत्त्वपूर्ण निषेध सम्पर्क का है। लौकिक (अपवित्र) का पवित्र के साथ सम्पर्क का निषेध ही इसका आधार है। दृष्टिपात भी एक तरह का सपर्क ही है। यही कारण है कि खास-खास अवस्थाओं में लौकिक (अपवित्र) आदमियों का पवित्र चीजों को देखना वर्जित है। उदाहरण के लिए कुछ चीजें जो पवित्र समझी जाती हैं, उन्हें स्त्रियां नहीं देख सकतीं। शब्द (अर्थात्) वह सांस जो आदमी का हिस्सा है और आदमी से बाहर फैलता है वह भी सम्पर्क का दूसरा रूप है। इसलिए लौकिक (अपवित्र) के लिए चीजों का संबोधन करना अथवा उनका उच्चारण करना वर्जित है। उदाहरण के लिए ब्राह्मण को ही वेद का उच्चारण करना चाहिए, शूद्र को नहीं। एक असाधारण समीप्य का सम्पर्क भोजन करने के परिणामस्वरूप उत्पन्न होता है। इसलिए पवित्र जानवरों अथवा पवित्र सब्जियों या वनस्पतियों के खाने का निषेध किया गया है।

जिन निषेधों का पवित्र वस्तुओं से संबंध है उनके बारे में चर्चा नहीं की जा सकती। यदि वे चर्चा से परे की वस्तु हैं तो बिना किसी तर्क-वितर्क के स्वीकार की जानी चाहिए। जो पवित्र है वह अस्पृश्य शब्द के विशिष्ट अर्थों में अस्पृश्य है अर्थात् उस पर कोई विवाद नहीं हो सकता। जो कुछ किया जा सकता है वह इतना ही है कि पवित्र का सम्मान किया जाए और उसकी आज्ञा मानी जाए। अंतिम बात यह है कि पवित्र वस्तुओं संबंधी निषेध सभी पर लागू होते हैं। वे स्वयं सिद्ध सत्य नहीं हैं। वे आज्ञाएं हैं। उनका पालन होना ही चाहिए और वे शाब्दिक अभिव्यक्ति नहीं हैं। वे अनुल्लंघनीय आदेश हैं। उनका उल्लंघन या न मानना अपराध से भी अधिक है, पाप है।

धर्म के क्षेत्र और कार्यकरण को समझने के लिए उपर्युक्त कथन पर्याप्त होना चाहिए। उस विषय का अधिक विवेचन अनावश्यक है। जो पवित्र है उसके संबंध में जो नियम हैं उन नियमों के अनुसार कार्य करने के ढंग के विश्लेषण से यह बात किसी के भी समझ में आ जाएगी कि गोमांसाहार ने छितरे व्यक्तियों को क्यों अछूत बना दिया? इस प्रश्न का मेरा उत्तर ठीक है। मैंने जो उत्तर दिया है उसकी गहराई तक पहुंचने के लिए इतना ही आवश्यक है कि जो पवित्र है उसके नियमों के काम