14. गोमांस भक्षण से छितरे बहिष्कृत व्यक्ति अछूत कैसे बने? - Page 143

128 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाड्ख्.,मय

करने के ढंग का विश्लेषण गो को पवित्र वस्तु मान कर हृदयंगम कर दिया जाए। यह स्पष्ट हो जाएगा कि अस्पृश्यता पवित्र पशु गो के न खाने के निषेध को तोड़ने का ही परिणाम है।

जैसा कि ऊपर कहा गया है ब्राह्मणों ने गो को एक पवित्र जानवर बनाया। उन्होंने जीवित और मृत गो में किसी प्रकार का भेद करने की भी आवश्कता नहीं समझी। गो पवित्र थी चाहे जीवित हो, चाहे मृत। गोमांसाहार केवल एक अपराध ही न था। यदि यह केवल एक अपराध होता तो इसका परिणाम केवल दंड होता। गोमांसाहार पाप ठहराया गया। यदि कोई गो को पवित्र जानवर न माने तो वह पाप का भागी होता था और उसके साथ मेलजोल रखना वर्जित था। छितरे आदमी, जिन्होंने गोमांसाहार जारी रखा, पाप के भागी हुए।

एक बार गो पवित्र मानी जाने लगी और छितरे आदमियों ने उसका मांस खाना जारी रखा तो उनके भाग्य में एक ही बात थी और वह यह कि उनके साथ उठना बैठना बंद हो जाए अर्थात् वे अछूत बन जाएं।

इस प्रकरण का अंत करने से पहले यह आवश्यक प्रतीत होता है कि इस मत के विरुद्ध दो संभव आपत्तियों का उत्तर दे दिया जाए। इस मत के विरुद्ध दो आपत्तियां तो स्पष्ट ही हैं। एक तो यह है कि इस बात का क्या प्रमाण है कि छितरे आदमी मृत गो मांस खाते थे? दूसरा प्रश्न यह है कि जब ब्राह्मणों तथा अब्राह्मणों ने गोमांस भक्षण छोड़ा तो उन्होंने (छितरे व्यक्तियों) भी क्यों नहीं छोड़ दिया? इस पुस्तक में छुआछूत की उत्पत्ति के संबंध में जिस सिद्धांत का प्रतिपादन किया गया है उससे इन प्रश्नों का सीधा संबंध है। इसलिए इनका निराकरण करना ही होगा।

सचमुच पहला प्रश्न उचित और संगत है और एक प्रकार का मापदंड भी है। यदि छितरे व्यक्ति आरंभ से ही गोमांसाहारी थे तो स्पष्ट ही है कि हमारे इस नए सिद्धांत के लिए कोई जगह नहीं, क्योंकि यदि वे आरंभ से ही गोमांसाहारी थे और तब भी अछूत नहीं समझे जाते थे तो यह बात कहना कि गोमांसाहार के कारण छितरे आदमी अछूत बन गए। यदि यह एकदम पागलपन की बात नहीं है तो तर्कसंगत तो है ही नहीं। ब्राह्मणों ने गोमांसाहार छोड़ दिया और अब्राह्मणों ने उनका अनुकरण किया तो इन छितरे आदमियों ने भी यही क्यों नहीं किया? यदि विधान ने गोवध को महान पातक बना दिया था क्योंकि ब्राह्मणों और अब्राह्मणों के लिए गो पवित्र जानवर बन गया था तो इन छितरे आदमियों को भी गोमांस खाने से क्यों नहीं रोका गया? यदि उन्हें गोमांस खाने से रोक दिया गया होता तो अस्पृश्यता का जन्म ही नहीं होता। पहले प्रश्न का उत्तर यह है कि जिस समय एक स्थान पर बसी हुई जातियां और