142 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाड्ख्.,मय
यदि यह मान कर चलें कि दोनों सूचियां एक ही वर्ग के लोगों की हैं तो इन प्रश्नों का कोई भी संतोषजनक उत्तर दे सकना टेढ़ी खीर है और यदि यह स्वीकार कर लें कि ये दोनों सूचियां भिन्न-भिन्न वर्गों के लोगों की हैं तो ये सब प्रश्न व्यर्थ हो जाते हैं। ये सूचियां भिन्न वर्गों के लोगों की हैं। क्योंकि शास्त्रों की सूचियां अपवित्र लोगों की हैं और आर्डर-इन-कौंसिल की सूची अछूत लोगों की है। यही कारण है कि दोनों सूचियां भिन्न हैं। दोनों सूचियों का भेद जो दूसरी बात से सिद्ध करने का प्रयत्न किया गया है इसी के पक्ष में है कि शास्त्रों में जिन वर्गों का वर्णन है वे केवल अपवित्र हैं। उन्हें आज के अछूत लोगों के साथ मिलाना भूल है।
अब दूसरी बात को लें। यदि अपवित्र और अछूत एक ही हैं तो ऐसा क्यों है कि 429 जातियों में से एकदम 427 जातियों का स्मृतियों को ज्ञान ही नहीं। स्मृतियों के समय में वे जाति रूप में विद्यमान रही ही होंगी। यदि अब अछूत हैं तो वे उस समय भी अछूत रही होंगी, तो तब की स्मृतियों में उनका नाम क्यों नहीं है?
अब तीसरी बात लें। यदि अपवित्र एक ही ओर वही हैं तो जिन जातियों का नाम स्मृतियों में आता है उनका नाम आर्डर-इन-कौंसिल की सूची में क्यों नहीं आया है, इस प्रश्न के केवल दो उत्तर हो सकते हैं। एक तो यह कि यद्यपि वे एक समय अछूत थे किंतु बाद में अछूत नहीं रहे। दूसरा यह कि दोनों सूचियों में ऐसी जातियों के नाम हैं जो एकदम भिन्न वर्ग की हैं। पहला उत्तर निराधार है क्योंकि छुआछूत तो सनातन है। समय न तो इसे मिटा सकता है न दूर ही कर सकता है। एकमात्र संभव उत्तर दूसरा ही है।
अब चौथी बात लें। इन दोनों सूचियों में एकमात्र चमार को ही क्यों स्थान मिला? इसका यह उत्तर नहीं हो सकता कि दोनों सूचियां एक ही वर्ग के लोगों की हैं। यदि यह उत्तर ठीक होता तो न केवल चमार, किंतु स्मृतियों की सूची में दी गई शेष सारी जातियों के नाम दोनों सूचियों में आए होते। लेकिन वे नहीं आए हैं। ठीक उत्तर यही है कि दोनों सूचियां दो भिन्न वर्ग के लोगों की हैं। अपवित्रों की सूची में से कुछ अछूतों की सूची में भी हैं। इसका कारण यही है कि जो एक समय अपवित्र थे वे बाद में अछूत हो गए। यह ठीक है कि चमार का नाम दोनों सूचियों में आता है लेकिन यह कोई इस बात का प्रमाण नहीं हो सकता कि अपवित्र और अछूत में कोई भेद नहीं। इससे यही सिद्ध होता है कि चमार जो किसी समय अपवित्र था बाद में अछूत बन गया। इसलिए उसका नाम दोनों सूचियों में शामिल करना पड़ा। स्मृतियों में वर्णित बारह जातियों में से अकेले चमारों को ही अछूत क्यों बनाया गया, इसका कारण समझना कठिन नहीं है। चमार और अन्य अपवित्र जातियों में जिस बात ने भेद की