अशुचि और अछूत
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दीवार खड़ी की है यह बात गोमांसाहार है। जिस समय गो को पवित्रता का दर्जा मिला और गोमांसाहार पाप बन गया उस समय अपवित्र लोगों में जो मांसाहारी थे केवल वे ही अछूत बने। केवल चमार ही गोमांसाहारी जाति है इसलिए केवल इसी एक जाति का नाम दोनों सूचियों में आता है। चमारों के संबंध में जो प्रश्न है उसका उत्तर दो बातों के संबंध में निर्णायक है। छुआछूत इस बात का द्योतक है कि गोमांसाहारी ही अछूतपन का मूल कारण है और अपवित्र को अछूत से भिन्न करता है।
अस्पृश्यता और अपवित्रता एक ही नहीं है, इस बात का छुआछूत के काल निर्णय में बहुत महत्त्व है इसके बिना छुआछूत का समय निश्चित करने का प्रयत्न करना विषयांतर होगा।